दिल का रिश्ता दिल से निभायी, दिमाग से नहीं.

दिल का रिश्ता दिल से निभायी, दिमाग से नहीं.

 

आज मैं अपनी love story बताने जा रही हूँ और मुझे अपनी love story पर शान है, नाज है क्यों की मैंने ऐसा प्यार किया और निभाया भी जिसे शायद दुसरे कभी नहीं करते और करते भी तो उसे निभाने से पीछे हट जाते. आप भी मेरी love story सुनोगे तो रो पड़ोगे और आपको कहना पड़ेगा की यह दुनियाँ की best love story में से एक है.

मैं आपलोग के साथ यह story बस इसलिए share करना चाहती हूँ ताकि अगर आपको प्यार को लेकर किसी तरह के मन में शंका हो तो वह दूर हो जाएगा. उनका प्यार बढ़ जाएगा. उसके साथ जीने-मरने की बेताबी बढ़ जाएगी, उनका केयर बढ़ जाएगा, उनका अपने प्यार के प्रति सम्मान बढ़ जाएगा. सच कहूँ तो आपको भी अपने साथी के साथ जन्म-जन्म का रिश्ता बांध लेने का मन करेगा. चाहे जो भी उसका condition हो. दुःख में हो, दर्द में हो किसी भी अवस्था में हो आप अपने प्यार को बस पा लेना चाहोगे. भले ही आप उसे अभी धोखा दे रही हो या उसके ख़राब condition के चलते उसे छोड़ के जाना चाहती हो.

 

दिल का रिश्ता ऐसा ही शुरू हुआ था- 

 

मेरी भी love story शुरू हुई थी उसी नादानी से जैसे अक्सर सभी का होता है. पता ही नहीं चलता कब कोई अच्छा लगने लगता है. बस उसे देखने की एक चाहत सी जगी रहती है. जब भी मैं अपने घर से कॉलेज जाती थी. तो कुछ दूर जाने के बाद गली के अंतिम छोड़ पर एक घर था. बहुत ही प्यारा सा. उजले रंग की घर में गजब की रंगत थी. घर के आगे छोटे-छोटे फुल लगे थे. बिच में रास्ता था और उसके दोनों और फुल लगे थे. आगे चल के बालकनी आता था और शायद वही से घर में जाने का रास्ता भी था. मैं रोज आते जाते उस घर के तरफ देखा करती. इसलिए नही की वह घर अच्छा था बल्कि इसलिए की उस घर के बालकनी में एक लड़का बैठा रहता था. सुन्दर सा, घुघराले बाल और आखें बड़े-बड़ी.

जब भी मैं वहाँ से गुजरती वह हमेशा chair पर बैठे book पड़ता हुआ दिखाई देता था. न जाने कब वह अच्छा लगने लगा. वहाँ से गुजरते हुए उसे एक देख लेने से दिल को बड़ा सुकून मिलता था. उसे देखने के लिए घर से जल्दी निकल जाती और कॉलेज से छुटते ही उसके घर के तरफ आ जाती. कभी-कभी उसके वहाँ नहीं होने से मन बेचैन हो उठता. अगली सुबह का बेसब्री से इतंजार करती. हम दोनों अब भी अनजाने थे एक-दुसर से. ना वह मुझे जनता था न मैं उसे. कब कैसे मिले कुछ समझ नहीं आ रहा था. वह शादी शुदा है या सिंगल वह भी मुझे नहीं पता था. कुछ नहीं जानने के बाद भी वह मुझे अच्छा लगने लगा था.

 

दिल का रिश्ता – मैंने उसे पसंद पसंद किया 

 

एक दिन मैं उसके घर के आगे से गुजर रही थी. देखा तो वह वहाँ नहीं था. मैंने चारो तरफ देखा. एक 8 साल का लड़का वही पर खेल रहा था. पता नहीं क्या हुआ दिल ने आवाज लगा दी “बाबु इधर आना.” वह मेरी तरफ आने लगा मैं घबडा सी गई क्या बोलूंगी अब.

“जी कहिये” वह प्यारा सा बच्चा मेरे सामने खड़ा था.

“एक लड़का वहाँ बैठा रहता है कहाँ है वह?” मैं सकपकाते हुए बोली. ”वह मेरे अंकल है. अभी कही गये है काम से? वह प्यारी आवाज में बोला – “और आप कौन है?” वो मेरे तरफ देखते हुए पूछा. वह भी अंकल की तरह ही काफी सुन्दर था.

“मैं उनकी दोस्त हूँ. उनसे कुछ काम था.” मैंने झूठ बोला.

“तो आपको बात करनी है अंकल से!” उसने कमर पर हाथ रखते हुए बोला – “अंकल आपको अच्छे लगते है?”  मुझे सूझ नहीं रहा था क्या कहूँ. बस छोटा सा बच्चा और उतना बड़ा सवाल. मैंने बस सर हिलाकर हाँ कर दिया.

“मैं आपकी बात अंकल से करा दूंगा. आप अपना number दे दीजिये” बड़े ही प्यारा लग रहा था. मगर बाते उन्ती ही बड़ी लग रही थी. जैसे सारा प्रॉब्लम वही solve कर देता है. मैंने अपने number लिखा और उसे दे दिया. वह मेरी तरफ देखा और मुस्काते हुए चला गया.

 

दिल का रिश्ता – मैं उसके call का wait करने लगी 

 

दो दिन बाद उसका call आया. हमारी बाते हुई. मैंने उसे सारा बात बताया. मैं उसे बताई की वह बहुत स्मार्ट है. उसने thnx बोला. उसके जैसा उसके आवाज भी सुन्दर थी. एक मिठास थी. मैंने उसे कॉफ़ी चलने के लिए पूछी. मगर उसने मना कर दिया. काफी रिक्वेस्ट करने के बाद भी वह नहीं माना. पता नहीं क्यों मना कर दिया उसने. मैं लगभग रोज उसे call करती और उसे कॉफ़ी पर आने के लिए रिक्वेस्ट करती. पर वह मना कर देता. मैं समझ नहीं पा रही थी की मना क्यों कर देता था. लड़के तो इस फ़िराक में लगे रहते है. की लड़की को कॉफ़ी पर ले जाये. मगर यह किस तरह का लड़का है. लड़की बोल रही है फिर भी मना कर दे रहा है.

बहुत रिक्वेस्ट करने पर वह बोला ठिक है उस से पहले आकर मुझसे मिल लो. मुझे कुछ बताना है. मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. इतने रिक्वेस्ट के बाद फाइनली उसने मुझे मिलने के लिए बुलाया. मैं अगले दिन का wait करने लगी. अगले सुबह में तैयार होकर निकल गई. काफी खुश थी. उस से मिलने के लिए. काफी रिक्वेस्ट के बाद ये मौका मिला था. मैं भी काफी सजी हुई थी impress करने के लिए.

अब मैं उसके घर के आगे पहुच गई गई थी. देखा तो बालकनी में आज कोई नहीं बैठा था. मैं सड़क से लगे उसका दरवाजा खोला और गेट के अंदर आकर खड़ी हो गई. कुछ ही देर में जो देखो उसे अपने आँखों पर भी विश्वास नही हुआ. चेहरे का मुस्कान कही गायब हो गया. खिले हुए फुल तेज धुप में मुरझा गये. सुबह का सुकून देने वाली सूर्य की रौशनी अब दोपहर में जलाने लगी. सारे सपने टूटते हुए नजर आने लगे. वह अपने पैरो पर खड़ा नहीं था. वह व्हील chair पर बैठ था और छोटा बच्चा उसे पीछे से सहारा देकर ला रहा था.

 

दिल का रिश्ता – मैं कुछ पागल हो गई थी.

 

मैंने मुड़ी और वापस आ गई. मुझे समझ में नहीं आ रहा था की क्या करू. शायद इसी वजह से वह मुझे कॉफ़ी के लिए मना करता रहा और इसीलिए बुलाया था ताकि सच्चाई पता चल सके. उस दिन पूरी रात सो नहीं पाई. पता नहीं चल रहा था क्या करू. मैं उस से प्यार करने लगी थी. मैं उसे पाना चाहती थी. मगर दिमाग बिच में आकर कहता की नहीं ऐसा मत करो. मत मिलो उस से. वह अच्छा नहीं है. वह अपाहिज है. तो दिल बिच में आकर टोकता “ये क्या प्यार की हो. वह अपाहिज है तो क्या हुआ. उसका दिल कैसा है यह देखो. शरीर अपाहिज है? दिल नहीं. जिसका दिल अपाहिज हो वह ख़राब है. तुम कल मिलो और अपनी दिल की बात बता दो उसे. इसी द्वन्द में पता नहीं कब नींद आ गई.

अगली सुबह जब उठी तो मन साफ हो गया था. काले बादल छट चुके थे. क्या करना है अब पता चल चूका था. मन में न तो अब कोई शंका थी न संदेह. कल के अपने किये पर शर्मिंदगी भी हुई.

 

दिल का रिश्ता – और मैं हमेशा हमेशा के लिए उसकी हो गई.

 

आज फिर मैं सजी हुई थी. और बड़े ही आत्मविश्वास के साथ जा रही थी उसके घर. उसे सब बताने. उसे हमेशा के लिए अपना बनाने. अपाहिज शारीर हो तो कोई बात नहीं दिल नहीं होना चाहिए. उसका शरीर अपाहिज है मेरा तो नहीं. मैं उसका शारीर बनूँगी. मैं उसका सहारा बनुगी. यही सोचते ही उसके घर पहुची.

कॉफ़ी की table सजाई उसे ही कॉफ़ी हाउस बना दिया. फिर उसे सरप्राइज दिया. वह काफी खुश था. मैंने वही उसे प्रोपोज भी किया और उसने एक्सेप्ट कर लिया. अब हमलोग साथ है. शादी करके सेटल हो गये है. हमारा कभी झगड़ा नहीं होता है. हमलोग ख़ुशी से अपनी लाइफ बिता रहे है. एक आम इन्सान से अच्छा जो शारीर से अच्छा होने के बाद भी एक दुसरे के साथ नहीं रहा पाते है. उनका दिल अपाहिज हो गया है. वह दिल से नहीं दिमाग से फैसले करते है. दिल का रिश्ता, से निभाया जाता है दिमाग से नहीं.

 

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