है इंतजार इस दिल को……की आएगी …….जरुर आएगी वो.

है इंतजार इस दिल को……की आएगी …….जरुर आएगी वो.

 

हेल्लो दोस्तों मैं मयंक आप लोग से अपनी दुखभरी love story share कर रहा हूँ. एक दर्द है मेरे सिने में जिसे मेरे प्यार ने मुझे दिया है. वह बिच रास्ते में हाथ छोड़ कर चली गई. वह दर्द शायद आपलोग के साथ बाटने पर कम हो. मुझे समझ नहीं आ रहा है की क्या करू. आपलोग जरुर बताये.

मैं अपना facebook खोला तो उस पर एक लड़की का friend रिक्वेस्ट आया था. मुझे लगा कोई मुझे उल्लू बना रहा है. क्यों की मेरे friend लिस्ट में कोई भी लड़की नहीं थी. मैं बहुत सारी लड़कियों की रिक्वेस्ट भेजता भी था मगर कभी किसी ने एक्सेप्ट नहीं किया. मैंने उसका friend रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर दिया.

धीरे-धीरे उसने message भेजना शुरू कर दिया. और हमारा बात होने लगा. हम घंटो facebook पर चैट करते रहते. हम दोनों ने अपने बारे में सारी बाते share किया. हम दोनों को एक दुसरे के लिए प्यार का एहसास होने लगा. अब तो खाते-पिते, सोते-जागते बस चैट होता रहता. फ़ोन से कभी-कभार बात हो जाता था. धीरे-धीरे हमारी मुलाकात भी होने लगी. मैं कॉलेज में पढता था और वह मेरे ही शहर के स्कूल में पढ़ती थी.

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है इंतजार इस दिल को  – हम दोनों का प्यार शुद्ध था

 

जब भी मैं कॉलेज जाता और वह स्कूल जाती तो रस्ते में हमारी मुलाकात हो जाती. हमलोग कुछ देर रुकते एक-दुसरे को मन घर आखों में भरते और अपने-अपने रस्ते निकल जाते. हमारी टाइमिंग इतनी अच्छी हो गई थी की बिना call किये या बिना बताये ही हमलोग का रास्ते में मुलाकात हो जाता.

कुछ दिन बाद हमारी मुलाकात बढ़ने लगी. हमलोग class छोड़कर मिलने लगे. जितना ही मिलते मिलने की प्यास बढता जाता. ऐसा लगता हमेशा उसके पास रहू, उसके बाते सुनु. जब कभी वह थोड़ी सी भी देर हो जाती तो मन बेचैन हो उठता. उसके आते ही चेहरा खिल उठता जैसे सूर्य की रौशनी पड़ते ही मुड्झाये फुल खिल उठते है.

कुछ दिन बाद उसने मुझे बताया की उसके class का एक लड़का उस से बात करना चाहता है मगर मैं उस से नफरत करती हूँ. मैं उस से बात नहीं करना चाहती. उसकी शिकायत उसने स्कूल में भी कर रखी थी. मुझे अच्छा लगा की जो बात है वह हमसे share तो ती. अब मैं उसके साथ स्कूल तक जाता और छुट्टी के बाद receive करने जाता. एक बार उसने कहा की सर्दियों के सुबह में कुहासा होने से मुझे अकेले जाने में डर लगता है. उस दिन से मैं भी उसके साथ सर्दियों में जाता. वह जहाँ भी जाती मुझे साथ ही लेकर जाती. मैं उसका साया बन गया था.

जहाँ वह वहाँ मैं. मुझे भी उसके साथ रहना पसंद था. ऐसा लगता हम एक दुसरे के बिना रह ही नहीं सकते. हम दो जिस्म थे मगर जान एक हो गया था. यह कोई जवानी का भूल नहीं था और न बचपन का नादानी. यह शुद्ध और पवित्र बंधन था. जिसका जोड़ मजबूत था. हम एक दुसरो को यादो में बसाये आगे बढ़ रहे थे. यह मेरे जीवन का सबसे सुनहला लम्हा चल रहा था.

 

है इंतजार इस दिल को – कभी न छोड़ने का वादा होता

 

आज दिवाली का दिन था. चारो तरफ रौशनी-ही-रौशनी थी. पूरा शहर पटाखों की गूंज से गुन्ज्मान हो रहा था. सभी घरो में लगी टिमटिमाती लाइट शहर की सुन्दरता में चार चाँद लगा रही थी जैसे कोई दुल्हन टिमटिमाती साडी पहन कर बैठी हो. इतना प्यारा नजारा था या शायद मुझे ही ऐसा लग रहा था. प्यार में पतझड़ भी सावन जैसा लगने लगता है. मुझे उसने आज मुझे बुलाया था. वह मेरे सामने थी. ब्लैक शूट में. जिसे मैंने गिफ्ट किया था. एक परी सी सुंदर, नदियों सी चंचल उस चेहरे को अपने आखो में भर रहा था. नजरे उस पर जम सी गई थी. मैं उसे एकटक से देख रहा था. उसने इशारे से अपने सर उठाया जैसे पूछ रही हो..”क्या देख रहे हो ऐसे?”

“कुछ भी नहीं” मैं मुस्काते हुए दुसरे तरफ देखने लगा. मेरी चोरी पकड़ी गई थी. मगर क्या करता उस से ज्यादा अच्छा कुछ लग ही नहीं रहा था. मैं फिर उसे देखने लगा.

काफी दिन ऐसे ही बित गये. हमलोग मिलते, सपनों की बाते होती. कभी न छोड़ने का वादा होता. उसको हमेशा इस बात का डर होता “कही तुम मुझे छोड़ तो नहीं दोगे.” इसलिए जब भी मैं मिलता यह बात जरुर पूछती. मैं मुस्कुराकर उसके हाथ अपने हाथो में ले लेता. और उसे समझता “ये जो हाथ पकड़ा हूँ उसे मरते समय तक नहीं छोड़ूगा चाहे कैसी भी परिस्थिति आये या किसी का समना करना पड़े. मैं बस तुम्हारा हूँ और तुम्हारा ही रहूँगा. न पहले कोई इस दिल में था और न तुम्हारे बाद कोई इस दिल में आएगा. यह तुम्हारा है और तुम्हारा ही रहेगा.” वो अपना सर मेरे कंधे पर रख देती.

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है इंतजार इस दिल को – उसने call लेना बंद कर दिया

 

ये इश्क भी न ऐसी चीज है कब सर पर सवार हो जाती है पता ही नहीं चलता. हम अंधे की तरह दुसरे को प्यार करते चले जाते है. नशा सा चढ़ जाता है प्यार. जो उतरने का नाम ही नहीं लेता और जब उतरता है तो काफी देर हो चूका रहता है. जिस से हम प्यार करते है उसका प्यार कब दुसरे के लिए पनपने लगता है पता ही नहीं चलता है. हम आखें बंद कर उस पर भरोसा करते चले जाते है. ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ.

काफी दिन बित गये थे. उस से बात नहीं हो पाया. call करने पर कोई भी जवाब नहीं आया. मैं दिन भर उसके फ़ोन पर call करता रहता. रिंग होने के बावजूद कोई उसे receive नहीं करता. उस समय exam चल रहा था. मुझे लगा exam के तैयारी में व्यस्त होगी. इसलिए mobile को अवॉयड कर रखी होगी. मैं भी कुछ दिन के लिए call करना बंद कर दिया. मगर मेरा ध्यान दिन घर mobile पर लगा रहता. अब call कर दे…..अब कर दे. किसी का call आता तो बेचैनी से देखता और फिर चेहरा उदास हो जाता. उसका call नहीं आया. exam भी खत्म हुए काफी समय हो गया था. मगर उसका कोई पता नहीं था.

इधर मेरे घर में भाई का शादी आ गया. मैंने उसे बुलाया. मगर उसका न कोई जवाब आया और न ही वह आई. वह कहाँ है क्या कर रही है कुछ पता नहीं था. मुझे कुछ अनहोनी की आशंका होने लगी. मैं सभी से पता करना शुरू किया. मैं उसके एक friend से contact किया. उसने जो बतया मेरा दिमाग घुमने लगा. धडकन तेज हो गई. जबान लड़खड़ाने लगा. आखे नम हो गई. वह अपने class के लड़के से बात करने लगी थी जिसको बोली थी की नफरत करती हूँ. बात नहीं करना चाहती.

 

है इंतजार इस दिल को – कब आएगी वो

मैं उस से मिलने के लिए बेचैन हो गया. बहुत प्रयासों के बाद वह मिली. बिलकुल ही अलग हो गई थी. उसके बात करने का अंदाज बदल गया. जैसे किसी अजनबी से मिल रही हो. मैंने उसे बहुत समझाया मगर वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी. वह बोली अगर मेरी ख़ुशी चाहते हो तो मेरी लाइफ से दूर चले जाओ. मैं उसको बोलते हुए देख रहा था. कही भी सिकन का नमो-निशान नहीं था उसके चेहरे पर. क्यों खेलती है दिलो से ये लड़कियां. जिस से हम प्यार करते है. वही क्यों रुलाती है हमे. उन्हें यह पता क्यों नहीं होता की हम उनके बिना नहीं जी सकते.

मैं उस से हमेशा-हमेशा के लिए जुदा हो गया. मगर मैं उसे बिना जी नहीं सकता हूँ. जब तक यह सांसे चलेगी तब तक उसका ही जुबा पर नाम रहेगा. उसका ही इंतजार रहेगा इस सुने दिल में. है इंतजार इस दिल को……की आएगी …….जरुर आएगी वो.

 

 

 

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