Best short story – बीतो दिनों की याद

 

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मैं ज्यों ही अपने घर में प्रवेश किया तो देखता हूँ की हमारे दीदी, जीजा और उनके साथ कुछ और रिश्तेदार आये है. देखते ही मेरे ख़ुशी का ठिकाना नही रहा, बहुत दिनों के बाद हमलोग मिल रहे थे. काफी अरसा हो गया था उनका यहाँ आये हुए.

काफी कुछ उनलोग से बात हुआ. बाते करते-करते बहुत समय हो गया. बातो-ही-बातो में समय का कुछ पता ही नहीं चला. मेरे घर में मैं मेरे माता पिता और एक छोटा भाई भी साथ में रहता था दीदी की शादी हो गई थी. जो आज वर्षो बाद हमारे घर आई थी. पर माता पिता दीदी से अबतक खुश नहीं थे. वे अबतक पुरानी बातो को लेकर नाराज थे.पिता जी को मन से इच्छा होती की थोड़ा दीदी से बात कर ले, हाल समाचार जान ले. परन्तु उपरी मन से वही सामाजित परम्पराओ की लज्जा में लज्जित रहते थे.

 

Best short story – जब हमलोग पहली बार शहर आये.

 

मैं माँ, पिता जी को समझाते-समझाते थक चूका था की वो पुरानी बाते थी उनको भूल जाइये. आज दीदी बहुत खुश है. अपनी जिन्दगी में. जीजा जी भी अब इंजीनियर हो गये है. नये पीढ़ी में बदलते समय के साथ अगर दीदी ने कुछ कदम उठा भी लिए तो क्या गलत हुआ?

बात तब  की है जब हमलोग की पढाई के कारण पिताजी को गावं छोड़कर शहर आना पड़ा था. वे दिल  से शहर आना और बसना नहीं चाहते थे. उन्हें गावं से जयादा लगाव था, पर हमारी पढाई गावं से कभी पूरी नहीं हो पाती, इसलिए हमे शहर आना पड़ा. दीदी कॉलेज में थी, तब हम दोनों भाई मैं राहुल और मेरा छोटा भाई रोहित स्कूल में पढ़ते थे. दीदी हम सब में पढने में सबसे जयादा इंटेलीजेंट थी. वो पढाई भी बहुत करती थी. हमलोग भी उसी से पढाई करते थे. पिताजी भी बहुत खुश रहते थे. उन्हें लगता था उनका शहर में रहना सफल हो गया.

 

Best short story – उसने इंटर कास्ट शादी कर ली

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दीदी के साथ एक लड़का भी पढाई करता था. साथ रहते-रहते दोनों एक दुसरे के अच्छे और सच्चे दोस्त बन गये. दोस्ती बहुत जल्दी प्यार में बदल गया. दीदी शादी के लिए रवि से बोली, रवि तैयार हो गया. उसके घर में कोई था नहीं जो उसको कुछ बोलता, वो अनाथ था खुद कोचिंग पढाके अपनी पढाई पूरी करता था. दूसरी जाती के लड़के से शादी के बात पर पिताजी भड़क उठे. वे इस शादी के विरोध में थे. उनके नजर में ये शादी नहीं हो सकता था क्यों की एक उच्च जाती की लड़की की शादी किसी दुसरे जाती हो गई तो लोग क्या कहेंगे. गावं वाले जब ये बात सुनेगे तो क्या क्या बाते करेंगे. थूकेंगे हमारे नाम पर.

मगर नीलम भी अपनी बात पर अड़ गई. लाख मना करने के बावजूद भी वे लोग मंदिर जाकर शादी कर लिया. हमलोग भी पिताजी को बहुत समझाये की अब इन सब बातो को कौन मानता है, जात- पात सब अपने मन का भ्रम है. पर पिताजी गावं के रहने वाले , उनपर इन सब बातो का क्या असर पढने वाला.

वो दीदी पर बहुत गुस्सा हुए और उन्हें अपने घर से निकाल दिया, दीदी भी विवश थी, वो बोली की बस “एक बार पिताजी रवि को कही job मिल जाये तो हमलोग चले जाये जायेंगे.” पर पिता जी कहाँ मानने वाले थे, वे अपने बात पर अड़ गये तो अड़ गये.

दीदी भी चली गई. उसके बाद से वे कभी हमारे घर नहीं आये. हमलोग का बहुत मन होता था उनसे मिलने के लिए पर पिता जी के डर से चुप रहते थे.

 

Best short story – आज सभी खुश थे

 

आज पहली बार शादी के बाद दीदी हमारे घर आई थी. माँ भी बहुत खुश थी. पिताजी भी खुश थे, पर वो नाराजगी में अपनी ख़ुशी दबाकर रखे थे. फिर जब दीदी ने उन्हें मुस्कराकर उनका पैर छुई तो वो भी मुस्करा उठे.

सबके आखो में ख़ुशी के आसू थे. दीदी के साथ कुछ उनके दूर के रिश्तेदार भी आये थे, उनमे एक लड़की भी थी, जब से वो आई थी, मुझे घूरे जा रही थी. मुझे भी उसका घुरना अच्छा लग रहा था. मानो बहुत दिनों से जान पहचान हो, परन्तु मैं सम्भाल गया, जब पिताजी की और देखा तो. उन्ही सब बातो में मैं डूबा ही था की दीदी ने कहा हमलोग अब चले है. मैंने बहुत जिद्द की रुकने के लिए पर वो चले गये.

 

 

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