होली (holi) – रंगों का त्योहार – Indian festival-2017.

 

होली होली  – कब मानते है?

 

बसंत ऋतु में होली मनाते है. यह पर्व पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के पूर्णिमा को मनाया जाता है. हिंदी कैलेंडर के अनुसार चैत का पहला दिन साल का पहला दिन होता है. नये साल के आगमन में एक-दुसरे को रंग-गुलाल लगाकर बधाई देते है. और उत्सव मानते है. यह पर्व मार्च में आता है.

 

Indian festival – lohri festival (लोहड़ी)

 होली – कौन और कहाँ-कहाँ मानते है –

 

इस पर्व को हिन्दू भारतीय , प्रवासी भारतीय, नेपाली और भी देश में जहाँ भारतीय रहते है. प्रमुख रूप से यह भारत और नेपाल में ही मनाया जाता है. इसे हमलोग ‘रंगों का त्यौहार भी कहते है. होली को दो दिन मनाया जाता है. पहला दिन फाल्गुन के पूर्णिमा के दिन होता है. इस दिन होलिका दहन होता है. दूसरा दिन चैत का पहला दिन होता है. इस दिन एक-दुसरे को रंग-गुलाल लगते है. इसे कही-कही धुरन्दी, धुरखेल और धुलिबंदन कहा जाता है.

 

होली

होली के दिन ढोल बजा कर होली के गीत गया जाता है. होली के दिन लोग पुरानी कटुता भुलाकर एक दुसरे को गुलाल लगते है और फिर से दोस्त बन जाते है. दोपहर तक एक-दुसरे को रंग लगते है और गाने बजाते है. उसके बाद अपने घर जाकर स्नान करते है. फिर शाम को नए-नए कपडे पहन कर एक-दुसरे के घर जाते है गले मिलते है और मिठाइयाँ खिलाते है.  महाशिवरात्रि (MAHASHIVRATRI)–भगवान शिव की पूजा कब और कैसे करें

फाल्गुन मास में होने से इसे फाल्गुनी भी कहते है. होली का त्यौहार बंसंत पंचमी से ही शुरू हो जाता है. बसंत पंचमी को ही पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है. इसी दिन से फाग का भी गाना शुरू हो जाता है.

होली

होली की कहानी.

sankranti festival – Makar sankranti (मकर संक्रान्ति)

होली के पर्व की अनेक कहानिया है. इनमे से सबसे प्रसिद्ध कहानी है–

प्राचीन काल में हिरण्यकशिपू नाम का एक बलशाली असूर था. अपने बल के दर्प में वह अपने आप की ही भगवान् मानने लगा था. उसने अपने राज्य में भगवान् का नाम लेने पर ही पाबन्दी लगा दी. हिरण्यकशिपू का पुत्र प्रह्लाद ईश्वर का भक्त था. प्रह्लाद की ईश्वर भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकशिपू ने उसे अनेक कठोर सजा दिया. उसे पहाड़ से फेका गया, समुंद्र में फेका गया. परन्तु उसने ईश्वर की भक्ति का मार्ग न छोड़ा. हिरण्यकशिपू की एक बहन थी होलिका. उसे यह वरदान प्याप्त था की वह आग में भस्म नहीं हो सकती है. हिरण्यकशिपू ने आदेश दिया की होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठे. आग में बैठने पर होलिका ही जल गई और प्रहलद बच गया. ईश्वर भक्त प्रहलद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है. जिसे  ‘असत्य पर सत्य का विजय कहते है’

 

 

 

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