Kids story- शरारती बन्दर (भाग-3)

 

शरारती चुलबुल मदारी वालो के जाल में फस चूका था. उस को खाने में अब फल नहीं मिलता. उसको वही सुखी रोटियां मिलती थी. वह भी सुख कर पतला हो चूका था. कहा जब वह जंगले में था तो मोटा सा गाल निकला हुआ था. और अब तो कोई उसे देखे तो पहचान भी नहीं पायेगा. मदारी वाले उसे भी नाच सिखाने लगे. नाच नहीं करने पर डंडे भी खाने पड़ते.

चुलबुल अब बिलकुल ही बदल चूका था. न तो वह किसी से कुछ बोलता न ही किसी से कुछ भी बात करता. चुप-चाप अपना काम करता और सो जाता. इस तरह उसके दिन बीतने लगें. वह हमेशा एक-एक दिन गिनता. कब 2 साल पुरे हो रहे है. मगर वह अब कैद में था वहां से निकलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था.

 

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A STORY FOR KIDS – शरारती बन्दर

मदारी वाले चुलबुल को कभी इस शहर में तो कभी उस शहर में ले जाते. उसके साथ बहुत बन्दर होते थे सबको एक गाड़ी में भड़कर ले जाते और शहर के रोड पर लोगो की भीड़ जुट जाती तो उस से नाच कराते. फिर उसे एक कटोरा दे दिया जाता और वह सभी से उस कटोरे में पैसा मांगता.

ऐसी ही काफी दिन चलता रहा. चुलबुल की दोस्ती रामू बन्दर से हो गई. जो उस से उम्र में बड़ा था. चुलबुल अपनी सारी बात रामू से ही कहता था. क्यों की वो उसकी बाते ध्यान से सुनता और संत्वना देता. धीरे-धीरे उन दोनों में गहरी दोस्ती हो गई. कही भी जाते साथ जाते. कुछ भी करते साथ करते.

Kids story  – शरारती बन्दर

एक दिन चुलबुल ने भागने का प्लान बनया और रामू को बताया. पहले तो रामू डर गया. रामू बन्दर भी एक बार भागने की कोशिश किया था. फिर उसको इतना मार पड़ा की उस दिन से भागने के बारे में सोचता भी नहीं. फिर भी चुलबुल ने सारा प्लान बता दिया. रामू डरते-डरते तैयार हो गया.

एक दिन सभी बन्दर को ट्रक में लेकर कही दुसरे शहर में जा रहे थे. जहा बन्दर थे उसको जाली से बांध दिया गया था. ट्रक का छत खुला था. सारा कुछ प्लान के मुताबिक चल रहा था. चुलबुल अपने पास से एक चाकू निकला. बाज़ार से आते टाइम उसने एक चाक़ू को हाथ मार लिया था. क्यों की उसका प्लान बहुत पहले से था.

Kids story   – शरारती बन्दर

Kids story- शरारती बन्दर (भाग-3)

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रामू बन्दर आगे जा कर देख रहा कोई इधर देख तो नहीं रहा है. उसके साथ वाले सभी सो रहे थे. चुलबुल ने धीरे से जाल के एक गाठ को काटा. फिर धीरे-धीरे दो तिन काट दिया. अब वो वह से निकल सकते थे. उसने धीरे से रामू को इशारा किया. दोनों निकल कर ट्रक के छत पर बैठ गये. निचे तो कूद नहीं सकते थे क्यों की ट्रक तेजी से चल रही थी. फिर अचानक एक पेड़ का टहनी मिला. दोनो ने एक साथ छलांग लगे और टहनी को पकड़ लिया.

Kids story  – शरारती बन्दर

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अब दोनों आजाद थे. मगर रात हो रहा था. तो दोनों उसी पेड़ पर सो गये और सुबह होने का इंतजार कने लगे. ख़ुशी का उनका ठिकाना नही था. चुलबुल मन-ही-मन सोच रहा था. अब ऐसी गलती नहीं करना है. जिस से ऐसे सजा मिले. अब सब के साथ मिल कर रहना है. किसी को भी तंग नहीं करना है. मैं जाकर सभी से माफ़ी मांग लूँगा. इस बार माफ़ कर दो आज के बाद गलती नहीं होगा. मुझे समझ आ गया है. अपना घर ही सबसे अच्छा है. कैसे भी रही अपने घर में ही रहो. यहाँ आजादी है. अब उसे सुबह का इंतजार था.

 

 

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