Positive poem in Hindi – क्यों बैठे हो हार मानकर,

Positive poem – क्यों बैठे हो हार मानकर,     क्यों बैठे हो हार मानकर, क्यों सोये हो भय खाकर, उठो, जगो और चल पड़ो, अपने विजय पथ पर   रोने से क्या होगा, कोई नहीं आएगा चुप कराने, सोने…