Hindi stories for class 9 with moral values

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Hindi stories for class 9 with moral values

 

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बहुत समय पहले की बात है. उस समय स्कुल-कॉलेज नहीं होते थे. बच्चे पढने के लिए गुरुकुल में जाते थे. गुरुकुल गावं से दूर जंगल में होता था. सभी बच्चे ब्रहचर्य जीवन बिताते थे और शिक्षा ग्रहण करते. जीविका चलने के लिए गावं-गावं भिक्षा मांगते.

उस गुरुकुल में पढने के लिए एक विद्यार्थी ने नामांकन कराया. उसका नाम विद्याधर था. उसके साथ और भी लडको ने नामांकन कराया. उनकी पढाई शुरू गई. सभी विद्याथी मन लगाकर पढाई करने लगे. उस समय विद्याथी आश्रम की साफ़-सफाई खुद ही रखते थे. सभी आपने-अपने काम को पुरे मन से करते.

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समय बितता गया. सभी लड़के अच्छे अंक लाते और अगली कक्षा में प्रवेश कर लेते. उसमे विद्याधर नाम का लड़का हर साल फेल हो जाता. उसके फेल होने के वजह से उसके साथ वाले लड़के उस से काफी आगे निकल गए. विद्याधर उसी वर्ग में रहा. उसके पिछले वाले वर्ग के लड़के आगे जाने लगें. यह देख विद्याधर बहुत शर्मिंदा रहता.

 

अब उसने क्या किया ?

वह खूब प्रयास करता. फिर परीक्षा के समय सब कुछ भूल जाता. इस तरह 7-8 साल निकल गया. उसको पढ़ाने के लिए गुरुओ ने उसे अलग से भी पढ़ना शुरू कर दिया. मगर नतीजा कुछ नहीं निकल सका. वह साल-दर-साल फेल होता रहा.

उसको अब गुरुकुल में सब लड़के मंद्बुधि बुलाने लगे. गुरु भी उस से परेशान हो गये. अंततः एक दिन उसके गुरु ने उसे बुलाया और बोला – “विद्याधर, हमने अपने तरफ से तुम्हे पढ़ाने का बहुत प्रयास किया. ऐसा लगता है शिक्षा तुम्हारे भाग्य में है ही नहीं.

इसलिए तुमको अब शिक्षा ग्रहण नहीं करके अपने पिता के काम-काज में हाथ बटाना चाहिए. शिक्षा ग्रहण तुम्हारे बस की नहीं है. तुम्हारा सारा समान बांध दिया गया है. कुछ चना-चबेना भी है. रास्ते में भूख लगे तो खा लेना. आज तुम अपने घर जा रहे हो.”

विद्याधर कुछ नहीं बोला. उसके आखो से आसू धारा बह पड़ी. वह अपने तरफ से खूब मेहनत किया. फिर गुरूजी ने यह क्या कहा शिक्षा ग्रहण तुम्हारे बस की नहीं है. मैं कितना मंद्बुधि हूँ.

 

वह वहां से चला जाता है

अपने सभी साथियों से विदा लिया और भारी मन से अपने घर को चल पड़ा. एक-एक कदम से वह धरती में गड़ा जा रहा था. वह गुरुकुल से नहीं जाना चाहता था. घर जाकर वह पिता जी से क्या मुहँ दिखायेगा. क्या कहेगा की उनका लड़का मंद्बुधि है. उसके गुरुकुल से निकल दिया गया. है. उसके कदम घर के तरफ बढ़ नहीं रहे थे.

काफी दूर चलने के बाद उसे भूख लग आई. उसे गुरु जी का दिया चबेना याद आया. वह एक गावं के समीप गया. वहाँ एक कुआँ था वहीँ पर रुक गया. उसने गठरी से चबेना निकला और खाने लगा. खाने के बाद पानी पिने के लिए कुआँ के पास गया. जब वह पानी निकालने लगा तो देखा जहाँ से रस्सी आ-जा रहा था वह पर गढ्ढा हो गया था.

उसके दिमाग में एक बात बिजली सी कौंध गई. जब एक मुलायम रस्सी के बार-बार आने जाने से पत्थर पर निशान पड़ सकता है तो फिर बार-बार पढने से मुझे विद्या क्यों नहीं आ सकती.

उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गया. उसके अंदर उर्जा भर गया वह सोच लिया मैं भी पढ़ सकता हूँ. मैं भी शिक्षा ग्रहण कर सकता हूँ. जिस उदासी से वह घर को जा रहा था. वह खत्म हो गया वह सोच लिया अब घर नहीं जाना है.

 

क्या बदलाव आया उसमे

वह आत्मविश्वास से भर गया. वह तेज कदमो से वापस गुरुकुल चल पड़ा. और शाम होते-होते गुरुकुल आश्रम पहुच गया.

उसको देखकर सभी लड़के आश्चर्य चकित हो गए. आपस में बाते होने लगी. मंद्बुधि वापस क्यों आया है? विद्याधर सीधे गुरु के पास गया और प्रणाम किया.

“तुम अभी तक वापस नहीं गये?” उसके गुरु ने आश्चर्य चकित हो पूछा.

“गया था गुरूजी मगर बिच रास्ते से वापस आ गया. गुरूजी मैं वापस नहीं जाऊंगा. मैं खूब मन लगाकर पढूंगा.” आत्मविश्वास से भरपूर विद्याधर विनम्रता से बोला.

उसके आत्मविश्वास देख गुरूजी काफी प्रसन्न हुए. और उसे पढने का मौका दे दिया. विद्याधर अब मन से पढाई करने लगा. दिन रात, सुबह-शाम बस पढाई. सभी विद्याथी जब सो जाते तो भी वह पढ़ते रहता और इस तरह उसने अपने मंद्बुधि होने का बात झूठा कर दिया. आगे चलकर बहुत ही बड़ा विद्वान हुआ. और अनेको ग्रन्थ का रचना किया.

 

Moral of the story in hindi

अभ्यास में ही शक्ति है. जितना अभ्यास करोगे उतना ही बेहतर बनोगे.
कभी हार मत मानो. जीत तुम्हारे सोच में ही है.
कोई तुम्हे क्या कहता है इस बात पर ध्यान मत दो. अपना काम करो.
कोई काम असम्भव नहीं है बस करने की जरुरत है.
आप क्या बनोगे यह बात आपकी सोच पर निर्भर है.

 

Moral of the story in english

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The more you will practice , the more you will gain strength.

Never ever give up. Win is always in your head.

Nothing is impossible in this world. You have to just keep patience while doing things.

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