3 Short Hindi motivational stories for quick success

Our website is full of Hindi motivational stories for increasing confidence. You can read them by visiting our home page. The aim of ours is to provide story lovers with best possible stories on the internet. So that they don’t have to go anywhere in search of good stories.

3 Short Interesting to read Hindi motivational stories

We have written below some of our best Hindi motivational stories for success. कहानी आरम्भ करने से पहले हम आपसे अनुरोध करना चाहेंगे | आप नीचे कमेंट अवश्य करें की ये मोटिवेशनल कहानिया आपको कैसी लगी | Read and enjoy.

 

1. काम में निरंतरता कैसे लाएं ( motivational stories in hindi )

कोई काम शुरू करने से जयादा important है उसमे निरतंरता. हम कोई काम start तो कर देते है मगर 2 या 3 या 5 दिन जाते-जाते थक जाते है. जो energy से काम शुरू किया वह energy ही खत्म. हमारा मन कहने लगता है – छोडो यार अब नहीं करते है. क्या होगा कर के. कल से करेंगे. बहुत बोरिंग है अभी नहीं करेंगे. मन 10 तरह के बहाने बनाने लगता है. वह चाहता है कैसे भी इस काम को छोड़ दे. और हम अपने मन की बात मान भी लेते है और उस काम से अलग हो जाये है. फिर बदले में मिलती है ‘असफलता’.

 Hindi motivational stories – इसको एक कहानी से समझते है –

चंदन का exam शुरू होने में अब मात्र 2 महिना समय बच गया था. कितने ही दिन से वह पढाई करने के लिए टाइम टेबल बनाने के लिए सोच रहा था. आज कल करने के चक्कर में अभी तक नहीं बना पाया और ऐसे ही पढाई करता रहा. जिससे की तैयारी ठिक नहीं चल रही थी. exam धीरे-धीरे नजदीक आ रहा था. वह परेशान हो गया. वह सोच लिया वह आज ही टाइम टेबल बनायेगा और उसी के अनुसार पढाई करेगा.

जब वह टाइम टेबल बनाने बैठा तो देखा दो महीने में काफी सिलेबस कवर करना है.

सभी सिलेबस को दो महीने के हिसाब से रूटीन बनाने लगा. उस दिन वह जोश में था.

वह 12 घंटे रोज पढने का रूटीन बनाया. पहले –पहले दिन से बहुत जयादा मेहनत करने लगा.

पहला दिन

बहुत ही अच्छा से पढाई किया दूसरा दिन भी लगभग टाइम टेबल से ही पढाई किया.

तीसरा दिन लेट पढने बैठा और समय से पहले उठ गया. चौथा दिन 1-2 schedule मिस कर दिया.

5 वे दिन सोचा आज रेस्ट करते है जबकि टाइम टेबल में रेस्ट नहीं था.

अगले दिन उसने टाइम टेबल देखने की हिम्मत ही नहीं की.

उसका टाइम टेबल खत्म हो गया जिस जोश के साथ उसने शुरू किया था. वह खत्म हो गया. वह पुराने ढर्रे पर फिर से आ गया जहाँ से उसने शुरू किया था.

यह समस्या केवल पढाई के क्षेत्र में नहीं है.

जीवन के हर क्षेत्र में है. चाहे वह बिजनेस हो, चाहे पढाई, चाहे खेकुद या हेल्थ हो. हर जगह यही समस्या है. हम जिस बिजनेस को करना चाहते है. उसे शुरू तो कर देते है मगर थोड़े ही दिन में loss होने या ग्राहक नहीं आने पर घबडा जाते है और उस से बहार आ जाते है. हेल्थ में भी यही समस्या है. हर कोई चाहता है फिट रहना मगर एक्सरसाइज करना कोई नहीं चाहता है. पूछने पर पता चला की ‘किया था यार कोई फायेदा नहीं हुआ तो छोड़ दिया’. ये लोग ऐसे इन्सान है जो एक ही दिन योगा के सारे आसन कर लेंगे. एक ही दिन 5 km दौड़ लेंगे. और दुसरे दिन खत्म.

एक ही दिन में इनको फिट होने होता है.

इसका उपाए बहुत ही सिंपल है.

अगर आप पढने के लिए टाइम टेबल बना रहे है तो एक ही दिन बहुत जयादा टाइम मत दीजिये. छोटे से शुरुआत कीजिए. 1 या 2 घंटे ही दीजिये. एक वीक तक चलने दे. फिर आपको खुद लगेगा और पढू और आपका टाइम टेबल अच्छा चलने लगेगा. पढाई के साथ खेल-कूद और मनोरंजन को भी अहमियत दे.

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अगर आप हेल्थ बना चाहते है तो एक ही दिन 5 km मत भागिए या जिम में जाकर 2 घंटे पसीना मत बहाइये. हेल्थ बनाना चाहते है तो आप तेज कदमो से चलने का आदत डालिए और फिर कुछ दूर दौड़ने का फिर कुछ और आगे. जिम में जाकर पहले हलके से शुरू करे 2-4 दिन ऐसे ही चलने दे फिर आपको खुद ही इंटरेस्ट आने लगेगा और यही नियम सभी क्षेत्रो में लागु होता है.

आप कोई भी काम शुरू करना चाह रहे है तो शुरुआत छोटे से करे.

ऐसा करेंगे तो खुद ही इंटरेस्ट बढेगा.

उस काम को करने में आनंद आने लगेगा. फिर आप उस काम को आगे बढ़ा सकते है.

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2. शुन्य से शिखर पर ( Best Hindi motivational stories )

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मैं आज एक ऐसे लड़के की कहानी लिख रहा हूँ. जो शून्य से शुरू हुआ. यानी उसके घर में एक समय का खाना नहीं था. वह शिखर तक गया. यानी वह IIT क्वालीफाई किया और एक बढियां सी company में नौकरी ली. सफलता किसी की गुलाम नहीं है. यह उसी का हो जाता है जो इसे पाना चाहता है. और इसे पाने के लिए लगातार मेहनत भी करता है. Inspiring story – यह बताती है की अगर आप में लगन है तो रास्ते खुद-ब-खुद बनने लगते है.

अँधेरा में होते हुए भी दूर कही उजाले की रौशनी दिखाई देती है.

बरसात का समय था. काली रातें, कडकती बिजली और तेज बारिस. उस समय सभी अपने घरो में टीवी का मज़ा ले रहे थे. या फिर सो गये थे. एक घर में अभी भी सभी लोग एक ही कमरे में बैठे थे. श्याम लेटे-लेटे सोने का प्रयास कर रहा था. उसकी माँ बड़े ही आशा भरी निगाहों से उसके बापू को देखी. उसके बापू लाचार चेहरा बनाए ख़ामोशी में ही बोल रहे थे –

“क्या करू मैं, मैं थोड़ी चाहता हूँ की मेरा बेटा भूखा सो जाये.”

रात के 10 बज गये. बारिस धीमी हो गई. श्याम की माँ ने उसके बापू से बोली –

“बारिस धीमी हो गई है. थोड़ी चावल ही किसी से मांग कर लाते तो उसको उबाल कर खा लेते.”

Real Hindi motivational stories – उसके बापू कभी लौट कर नहीं आये.

उसके बापू को पता था की दुकानदार तो उधार देंगे नहीं.

और इतनी रात को अब कोई दरवाजा भी नहीं खोलेगा. उन्होंने बोला –

“तुम चूल्हा जलाओ और पानी को उबालो तब तक मैं कही से चावल की व्यवस्था कर के आता हूँ.

श्याम भी कब से सोने का प्रयास कर रहा था. मगर पेट तो खाना मांग रहा था.

कहाँ सोने देगा खाली पेट. उसे तो बस भरा होना चाहिए.

तुम्हारे पास है या नहीं ‘खाने के लिए’. उसे क्या मतलब है. श्याम भी अपने बापू का इतंजार करने लगा.

अब शायद खाना मिल जाएगा.

उसकी माँ पानी उबालकर इतंजार करने लगी.

1 घंटे हुए……………..2 हुए………….3 घंटे भी हो गये.

रात के 1 बज गये मगर उसके बापू नहीं आये. श्याम तो सो गया. भूख को हराकर. मगर उसकी माँ बैठी इंतजार करती रही. अब आए…..अब आए…..

मगर कोई नहीं आया. उबला हुआ पानी ठंडा हो गया और उसके साथ भूख भी.

सुबह हुआ.

पुरे गावं में खलबली मच गई. खोजने के लिए चारो तरफ लोग निकल पड़े. कोई कहता जानवर ले गये, कोई कहता नक्सल, तो कोई कहता गावं छोड़ कर चले गए.

कही भी कुछ पता नहीं चला. एक रात में कहा गायब हुए कुछ पता नहीं किसी को भी.

10वी में पढने वाले श्याम के मन में विद्रोह भड़क उठा.

वह अब समाज को सबक सिखने की सोचने लगा.

समाज उसकी नजर में विलेन हो गया था उसके चलते उसके बापू उनलोग को छोड़ के चले गये. समाज में फैली अराजकता को हटाने के लिए नक्सल गतिविधियों में शामिल होने लगा. वह उनकी विचार धारा में विश्वास रखने लगा.

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उसे अब यही लगता की हथियार ही समस्या का हल निकाल सकता है. लोगो को डरा कर धमकाकर ही कुछ किया जा सकता है. उसके माँ उसके विचारों से परेशान हो गई. और उसे समझाया – “किसी भी समस्या का अंत हथियार उठाना नहीं है. अगर तुम्हे समाज की बुराइयाँ ही दूर करना है तो शिक्षा से करो. शिक्षा हासिल करो. शिक्षा से ही समाज को सुधारो.”

मगर यह इतना आसान नही था. घर में एक वक्त का खाना नसिब नहीं हो रहा था. वह पढाई का खर्च कहाँ से उठा पाएंगे. सरकारी स्कुल का हाल भी किसी से छिपा नही है. ऐसी में पढाई करे भी तो कैसे? बढ़िया स्कुल मे गार्ड देखकर ही स्कुल के अंदर घुसने नहीं देगा. वहाँ तो टाई- बेल्ट और जूते वाले ही पढ़ सकते है. हवाई चप्पल और खाली पैर वाले नहीं.

किसी के कहने पर

उसकी माँ उसे पटना ले गई “सुपर थर्टी” के आनंद जी के पास. जब वह वहाँ पहुची तो उन दोनों के पैर में चपल भी नहीं था. मगर गुरु को चपल और जूते से क्या वो तो टैलेंट देखते है. उन्होंने उसका टेस्ट लिया और अपने पास रख लिया उसका सब खर्च सुपर थर्टी उठाने लगा. आनंद जी उसको पढने लगे. श्याम भी पुरे मन से पढने लगा. उसे अपने दिन याद थे भूखी राते, नंगा पैर.

उसका मेहनत रंग लाया. वह IIT में सेलेक्ट हुआ और पढाई पूरी करने के बाद company join कर लिया.

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3. एक अनोखी मोटिवेशनल कहानी ( Intersting Hindi motivational stories )

Motivational real story in hindi – एक अनोखी शक्ति की कहानी

यह एक ऐसी कहानी है जिसे आप पढ़ कर सोच में पड़ जायेंगे. मगर यह कोई चमत्कार नहीं है. यह शक्ति हर इन्सान में है. उसे कोई use करता है और कोई use नहीं करता मगर है सभी के अंदर. तो आइये कहानी पर आते है – अगर अच्छी लगे तो अपने लाइफ में भी use कर सकते है.

मैं अपने दादा के साथ अपने पुराने मिल में काम कर रहा था. दादा जी का पुराना मिल था मैं उनके काम में हाथ बटा रहा था.

उस मिल के बगल में ही बहुत किसान रहते थे. वह हमारा खेत बटाई पर लेते और उसमे फसल उगाते थे.

उस दिन एक घटना घटी. एक किसान की लड़की जो न तो अच्छा सा कपडा पहने थी और न ही बढ़िया से बोल पा रही थी. वह आकर मिल के दरवाजे पर खड़ी हो गई. उसे देखते ही दादा जी गुस्सा हो गये और जोर से चिल्लाते हुए बोले – “भाग जा यहाँ से, यहाँ आने के लिए किसने बोला तुमको. जल्दी भाग जाओ यहाँ से.”

“मम्मी ने 100 रूपये मांगे है वह बहुत बीमार है.” वह लड़की डर के भागने के बजाये अपनी बात रख दी. बिना डर के.

“जा यहाँ से भाग जा. मेरे पास पैसे नहीं है.” दादा ने फिर डाटते हुए बोले.

“जी जाती हूँ.” दरवाजे पर खड़ी हुई लड़की ने बोला और न तो वहाँ से भागी और न ही आगे गई. वही खड़ी रही.

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दादा अपने काम में व्यस्त हो गये. उन्होंने उसे देखा नहीं. वह लड़की वही खडी रही और एक टक से उनको देखते रही. कुछ देर बाद दादा जी का उसपर फिर से ध्यान गया. डाट लगते हुए बोले – “तू गई नहीं अभी तक.”

“जी जाती हूँ.” लड़की ने बोला और वही खड़ी रही.

“तू ऐसी नहीं मानेगी. तुझे पिटाई करना ही पड़ेगा.”

दादा जी गुस्से में थे और एक डंडा उठा कर उस बच्ची की तरफ चल पडे. ऐसा लगा जैसे आज उस लड़की को पिट कर ही छोड़ेंगे. वह आगे बढे और लड़की के पास पहुच गये. लड़की ऐसी ही खड़ी रही. जैसी ही दादा जी उसके पास पहुचे उसने दादा के आँखों में देखा और जोर से बोली “मम्मी को 100 रूपये चाहिए ही. वह बहुत बीमार है. उनको रूपये की जरूरत है.

उस समय एक अजीब घटना घटा. दादाजी जो की उस लड़की को मारने के लिए गये थे.

उन्होंने डंडा को निचे रख दिया और अपने पॉकेट से 100 रूपये निकल कर लड़की को दे दिया.

उसके जाने के बाद तक दादा जी उसे देखते रहे.

एक 10 साल की किसान की बच्ची उनको हरा दी थी. ऐसी कौन सी शक्ति थी उसमे.

डंडा उठाने वाला हाथ पैसा निकल कर दे दिया.

मैं भी वह खड़ा सारा चीज देखता रहा. एक लड़की अपने आत्मविश्वास और लगन से जीत हासिल किया.

अनजाने में सही उसके लगन ने उसे जीत दिला दिया.

Moral of this motivational stories in hindi

Any human can do anything in his or her life.

But to give full effort and focus in any thing, he or she should have the belief system strong.

 

4. How to become rich ( Short Hindi motivational stories )

अमीर बनने की चाहत हर एक इन्सान में होता है. सभी चाहते है की थोड़े से समय में अमीर बन जाये. मेरे पास इतना पैसा हो की अपना जरुरत ही नहीं शौक भी पूरा करे और भविष्य में कभी पैसे की कमी न हो. मैं आप सभी लोग यही चाहते है. मगर बन नहीं पा रहे है.

अमीरों की गिनती की जाये तो बहुत ही कम है और गरीबो की संख्या बहुत ज्यादा.

गरीब आदमी के मन में भी यह सोच है की मैं अमर बन जाऊं.

तो आखिर क्या है जो गरीब की अमीर नहीं बनने देती? वो क्या चीज है जो अमीर करता है और गरीब करता है? और कैसे कुछ व्यक्ति अमीर तो बन जाते है फिर कुछ सालो में अपनी सम्पति गवाकर गरीब हो जाते है. आप भी इन सभी प्रश्नों के उत्तर ढूंढ रहे होंगे तो आज मैं इन सभी प्रश्नों का उत्तर देता हूँ.

और यही बताऊंगा की क्या करके आप अमीर बन सकते है.

Hindi motivational stories lesson वह देखना जो दुसरे नहीं देख पाते

जो गरीब और मध्यम वर्गीय लोग है. वह पैसे के लिए काम करते है उनके अंदर पैसे का डर रहता है.

उसके अंदर अपने नौकरी जाने का डर रहता है. इसलिए वो एक ही काम किये चले जाते है. उनको यह डर सताता है की नौकरी छुट जाएगी तो परिवार का पेट कैसे चलेगा. इसलिए मन मसोसकर नौकरी करते रहते है. और यह सोचकर तनख्वाह बढ़ने का इतजार करते है की जयादा पैसा आने से समस्या सुलझ जाएगी.

इसी पैसे की समस्या सुलझाने के लिए वे दूसरी भी नौकरी कर लेते है.

मगर फिर भी समस्या नहीं सुलझती है.

जबकि अमीरों के लिए पैसा काम करता है. अमीर लोग पैसा देकर काम करवाते है. वे खुद के लिए काम करते है पैसे के लिए काम नहीं करते. अमीर लोग यह जानते है की पैसा कैसे काम करता है. पैसे से अपने लिए कैसे काम करवाया जाये. वे पैसे से अपने लिए काम करवाना सिख लेते है.

तनख्वाह का लालच और डर

हर नौकरी पेशा इन्सान का एक पैटर्न बन गया है जिसे वह आगे निकल नहीं पता.

उस में उलझ गया है या वो कुछ पैसे की लालच में वह उसी पैटर्न पर वर्षो तक काम करते चला जाता है.

वह पैटर्न है –

सुबह जागना, काम पर जाना और पैसा खर्च करना, सुबह जागना, काम पर जाना और पैसा खर्च करना.

लोगो की जिदगी इसी दो भावनाओ लालच और डर से चलती है. अगर उनको ज्यादा पैसा भी दे तो वे अपना खर्च बढ़ा लेंगे. जितनी उनकी आये बढ़ता है उनता ही उनका खर्च बढ़ते जाता है. उनको पैसे सम्बन्धी ज्ञान नहीं होता है. उनको यह जीवन भर एहसास नहीं होता की असली ज्ञान धन सम्बन्धी शिक्षा है.

इस अज्ञानता की वजह से वह चूहे ही दौड़ में चले रहते है.

और पुरे जीवन पैसा के समस्या से जूझते रहते है.

गरीबी का एक और कारण है डर. पहले तो पैसे के बिना रहने का डर से हमे कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है.

और पैसे के लिए कड़ी-से-कड़ी मेहनत किये जाते है.

इसके बाद जब हमे तनख्वाह मिलती है तो हममे लालच की भावना जग जाती है.

पैसा मिलने पर हम बढ़िया से बढ़िया चीजो के बारे में सोचने पर मजबूर हो जाते है जो उस पैसे से खरीद सकते है.

इस बारे में गरीब कभी नही सोचते

ज्यादातर लोग अपनी भावना से काम करते है.

दिमाग से सोचने का कष्ट नहीं उठाते है.

उन्हें डर लगता है ‘पैसे नहीं रहने का’ फिर वे नौकरी करने जाते है और उम्मीद करते है की जयादा पैसा आने से उनका डर दूर हो जाएगा. डर के कारण ही वे नौकरी के जाम में फसे रहते है.

पैसा कमाते है और काम करते है.

सच बात यह है की पैसा ही उनकी जिन्दगी को चलाता है.

परन्तु वे इस बारे में कभी नहीं सोचते और न कभी इस बारे में बात करते है.

पैसे की समझ यानी पैसा सम्बन्धी ज्ञान

हमलोग कहानियो में, न्यूज़ पेपर और टेलीविजन में ऐसा हमेशा सुनते आये है की वह पहले बहुत ही अमीर था.

किसी इन्सान के करोड़ो की लाटरी लग गई.

कुछ सालो बाद फिर पता चलता है की उसने अपने सारी सम्पति खो दी और अपना जीवन गरीबी में बिताने को मजबूर हो गया.

किसी-किसी का हालत इतना दयनीय हो जाता है की भीख मांग कर खाने पर मजबूर हो जाते है.

हाल ही एक खबर छपी थी.

एक फ़िल्मी सुपरस्टार जिसके पास शुरू में काफी धन था अब वह दर-दर की ठोकरे खा रहा है.

इन सब का क्या कारण है. इन सबका एक ही कारण है.

इनके पासा पैसे की समझ नहीं है. उनको यह पता नही होता की पैसा कहाँ लगाया जाये.

कैसे पैसे का संचय किया जाये. यह बड़ी बात नहीं की आपने कितना पैसा कमाया, बड़ी बात यह यह की आपने कितना पैसा बचाया. और आपने कितनी पीढियों तक इसे सहेजा.

क्या आपकी सोच खुली?

अब आपको यह समझ आ गया होगा को अमीर कैसे बनते है.

और जो गरीब है वो गरीब क्यों है. गरीब के पास पैसा आने का माध्यम बस एक है मगर खर्च करने का अनेक.

अमीर के पास यह सोच रहता है के कैसे पैसा से पैसा बनाया जाये.

पैसे को कहाँ और कैसे use किया जाये की और पैसा आये.

और उसके बाद उसे सुरक्षित रखा

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