5 Hindi stories for class 8 with moral – हिंदी कहानियां

Hello readers, today we are writing Hindi stories for class 8 students. With moral values both written in Hindi and English. I hope you will love this story too.

5 Hindi stories for class 8 with moral values

Below you will read hindi story on class 8 students.

अकेला सौ पर भारी

सुंदर नगर का वन बेहद ही सुंदर और आकर्षक था। यहां रहने वाले पशु – पक्षी और जानवर शांति से रहा करते थे। तालाब पर शाम होते ही पशुओं का जमावड़ा लग जाया करता था।

पक्षी भी आसमान में उड़ते – उड़ते अपनी आजादी की सांस लिया करते थे।

कुछ दिन से वहां रहने वाले पक्षियों को न जाने कहां से आई पक्षियों के झुंड ने परेशान किया हुआ था। अनावश्यक एक – दूसरे को तंग कर रहे थे , यहां तक कि जान से मार रहे थे। सभी पक्षी परेशान हो गए , उन्हें कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। सभी संगठित हो गए किंतु शत्रु पक्षी की शक्ति के आगे इनकी एक नहीं चल रही थी।

इस लड़ाई में सुंदरवन के पक्षियों की संख्या कम होती जा रही थी।

एक वृद्ध पक्षी ने सभी पक्षियों को बताया , पास के गांव में एक महात्मा ठहरे हुए हैं , उनसे सहायता मांग सकते हैं। सभी पक्षी बिना देर किए महात्मा के पास पहुंच गए। महात्मा ने उनकी परेशानी समझी और आश्वासन दिया वह निश्चिंत रहें उनके समस्या का समाधान अवश्य होगा।

वह महात्मा कोई और नहीं स्वयं गुरु गोविंद सिंह जी थे।

उनके पास एक बाज (चील) था जो अकेला सौ पर भारी था।

गुरु गोविंद सिंह ने उस बाज को सुंदरवन के पक्षियों का भय हरने के लिए भेजा।

बाज काफी शक्तिशाली था देखते ही देखते शत्रुओं से पूरा आसमान खाली हो गया।

सुंदरवन के सभी पक्षियों ने बाज तथा गुरु गोविंद सिंह जी का हृदय से धन्यवाद किया।

नैतिक शिक्षा

संगठित होकर अनेकों समस्या का समाधान हो सकता है , किंतु शक्तिशाली होना भी आवश्यक है। जो गुरु गोविंद सिंह के बाज ने कर दिखाया था।

Moral of the story

  • We should always remain united against any difficult situation.
  • We can defeat anyone if our group thinks like one single unit.
  • Never give chance to your enemy to rule on you.

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जब रखोगे तभी तो उठाओगे

जब रखोगे तभी तो उठाओगे – धनीराम नाम का एक व्यक्ति था ।वह मेहनत करके अपने परिवार का पालन पोषण करता था ।वह धीरे-धीरे कामचोर बनता गया। और एक दिन नकारा हो गया। बैठे – ठाले ठगी का काम शुरू कर दिया।

उसने पहले जान पहचान वालों से उधार लेना शुरु कर दिया। जब लोग पैसे वापस मानते तो तरह-तरह के बहाने बना देता। जैसे-जैसे उसकी जान पहचान के लोग मिलते गए उस की पोलपट्टी खुलती गई। सब यही बात करते कि जब से उसने पैसे लिए हैं तब से मिलना ही बंद कर दिया।

जब जान पहचान के लोगों ने पैसे देने बंद कर दिए तो वह अपने रिश्तेदारों से उधार के नाम पर पैसे ऐठने लगा। पहले सगे रिश्तेदारों  से पैसे लेने शुरू कर दिए , इसके बाद दूर के रिश्तेदारों से पैसे मांगना शुरू कर दिया ।

एक दिन वह एक साधु प्रवृत्ति के व्यक्ति के पास गया।

उसने बैठा कर पानी पिलाया , फिर उससे पूछा तुम धनीराम ही हो ना ? उसने हां में सिर हिलाया। फिर पूछा कहो कैसे आना हुआ इतने बरसों बाद सब ठीक-ठाक तो है ; धनीराम ने उत्तर देते हुए कहा सब ठीक तो है लेकिन काम नहीं मिल पा रहा है घर में तंगी आ गई है , यदि कुछ रुपए उधार दे दे तो हालत संभल जाएगी। वह व्यक्ति बात करते हुए उठा और सामने आले में  50 रुपए रख आया। धनीराम चलने के लिए खड़ा हुआ तो उस व्यक्ति ने आले की ओर इशारा करते हुए कहा सामने आले  में 50 रूपय रखे हुए हैं ले जाओ जब हो जाए इसी में रख जाना उसने आले  मैं से रुपए उठाए और चला गया।

इसी प्रकार ठगी से वह अपनी नैया खेता रहा।

किसी ने दोबारा दे दिया किसी ने नहीं दिया अब वह बैठा-बैठा गणित लगाता रहा कि कोई छूट तो नहीं। जिससे पैसे मांगे जा सकते हैं या किस – किस के पास जाएं कितना कितना समय बीत गया जिनके पास दोबारा जाया जाए। ऐसे लोगों की उसने सूची बनाई जिनसे पैसे लिए हुए 3 साल हो गए थे इस सूची के लोगों के पास जाना शुरु कर दिया। लेकिन बहुत कम लोगों ने पैसे दिए अचानक उसे साधु प्रवृत्ति वाले व्यक्ति की याद आई।

सोचा अब तो वह भूल गया होगा उसी के पास चलते हैं।

जब धनीराम वहां पहुंचा तो उसे बैठाया पानी पिलाया और नाश्ता करवाया उस व्यक्ति ने पूछा सब ठीक-ठाक तो है।

धनीराम ने उत्तर देते हुए कहा सब ठीक तो है लेकिन , उस ने फिर पूछा लेकिन क्या ?

धनीराम बोला बच्चे भूखे हैं ,काम भी नहीं मिल रहा है , कुछ पैसे उधार दे देते तो काम चल जाता।

ले जाओ उसमे से आले  की ओर इशारा करते हुए उस व्यक्ति ने कहा। वह खुश होता हुआ उठा कि यह वास्तव में पिछले पैसे भूल गया है ,इसने ना पिछले पैसों की चर्चा की और ना मांगे। यही सोचते – सोचते आले  तक आ गया उसने आले में हाथ डाला तो कुछ नहीं मिला। धनीराम ने उस व्यक्ति की ओर देखते हुए कहा इसमें तो कुछ नहीं है।

इतना सुनकर वह बोला जो तुम पैसे पहले ले गए थे क्या रखकर नहीं गए थे?

उसके मुंह से कोई उत्तर नहीं निकला। उसने ना में सिर हिलाते हुए उत्तर दिया।

उस साधु प्रवृत्ति वाले व्यक्ति ने सहज रुप से कहा तब फिर कहां से मिलेंगे जब रखोगे तभी तो उठाओगे वह चुपचाप बाहर आया और अपना समूह लिए चला गया।

Hindi stories for class 8 with moral
Hindi stories for class 8 with moral

जो कुआँ खोदता है वही गिरता है

( Hindi stories for class 8 students )

वजीर को यह बिल्कुल पसंद नहीं था कि बादशाह कारिंदे के लड़के से प्यार करें। वह चाहता था कि बादशाह उसके बेटे को प्यार करें और गोद भी ले ले ,जिससे बादशाह के मरने के बाद उसका लड़का बादशाह बने। वजीर जो चाहता था ठीक उसके उल्टा होता था। बादशाह कारिंदे के लड़के को अधिक प्यार करता गया।

एक बादशाह था। उसके महल की चारदीवारी में ही वजीर और एक कारिंदे का आवास था।  वजीर और कारिंदे के एक – एक लड़का था। दोनों लड़के आपस में पक्के दोस्त थे। दोनों हमउम्र थे और एक ही कक्षा में साथ साथ पढ़ते थे। दोनों खेलते भी साथ-साथ थे।

एक दूसरे के घर आना-जाना खूब था।

कारिंदे का लड़का वजीर को चाचा कहता था।

और जो भी काम वजीर कराता था वह कर देता था।

बादशाह के कोई संतान नहीं थी।
वह कारिंदे के लड़के को बहुत प्यार करता था। बादशाह इतना प्यार करता था ,कि लड़के के लिए महल और दरबार के दरवाजे खुले रहते थे। लेकिन वजीर को यह बिलकुल पसंद नहीं था ,कि  बादशाह कारिंदे के लड़के से प्यार करें। वह चाहता था कि बादशाह उनके बेटे को प्यार करें ,और गोद  भी ले जिससे बादशाह के मरने के बाद उसका लड़का बादशाह बन जाए।

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वजीर जो चाहता था ,ठीक उसके उल्टा होता था। बादशाह कारिंदे के लड़के को और अधिक प्यार करता गया। वजीर के लड़के से बादशाह का लगाओ पहले ही नहीं था, इसलिए वजीर कारिंदे और उसके लड़के से मन ही मन जलने लगा। ऐसा रास्ता खोजता रहा है जिससे उसका मन चाहा हो जाए जब कोई बात बनती नजर नहीं आई तो उसने सोचा कि कुछ ऐसा किया जाए जिससे ना रहे बांस न बजे बांसुरी।

एक दिन वजीर ने कारिंदे के लड़के को घर बुलाया। घर आने पर वजीर ने उसे एक रुमाल और पैसे देकर गोश्त लाने के लिए कहा। वजीर ने बताया कि गोश्त बाजार में फलां  गली के नुक्कड़ वाली दुकान से लाना है। लड़के ने रुमाल लिया ,पैसे  संभाले , और चल दिया। रास्ते में कुछ लड़के गुल्ली डंडा खेल रहे थे। उनमें वजीर का लड़का भी था।
वजीर के लड़के ने कारिंदे के लड़के को आता देखा तो चिल्ला कर पुकारा भैया कहां जा रहे हैं?

वजीर के लड़के ने कहा दोस्त मैं ले आऊंगा तुम मेरा गांव उतार दो।

चाचा ने उस दुकान से गोश्त मंगाया है उसने वजीर के बताए अनुसार दुकान तक पहुंचने का रास्ता बताते हुए उसे रुमाल और पैसे दे दिए।

वजीर का लड़का गोस्त  लेने के लिए चला गया और कारिंदे का लड़का दांव  उतारने लगा।

चलते-चलते वजीर का लड़का उसी दुकान पर पहुंचा उसने पैसे और रुमाल देते हुए कहा कि इसमें गोस्त  बांध दो। कसाई ने उस रुमाल को पहचान लिया। इस रुमाल में निशान बना हुआ था। इसी रुमाल को वजीर ने दिखाया था और कहा था कि जो लड़का इस रुमाल को लेकर गोश्त लेने आए उसका काम तमाम कर देना। उसके एवज में वजीर ने पैसे भी दिए थे,इस काम के लिए कसाई के अंदर एक भट्टी जलाकर पूरी तैयारी कर रखी थी।

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कसाई ने रुमाल और  पैसे लेकर कहा यहां बैठ जाओ अभी गोश्त बांधता हूं। उस समय दुकान पर कोई ग्राहक नहीं था वजीर का लड़का जैसे ही अंदर पहुंचा कसाई ने उसे पकड़ कर जलती भट्टी में झोंक दिया। उधर गांव उतारने के बाद कारिंदे का लड़का घर चला आया लगभग दो  घंटे के बाद वजीर अपने घर से निकला उसी समय कारिंदे का लड़का भी अपने घर से निकला। महल की चारदीवारी में ही दोनों का आमना – सामना हो गया वजीर पूछता उससे पहले ही कारिंदे के लड़के ने कहा !

चाचा भैया गोश्त ले आए ?

इतना सुनते ही जैसे वजीर को सांप ने डस लिया।

फिर कारिंदे का लड़का बोला चाचा रास्ते में भैया मिल गया था, वह मुझसे बोला कहां जा रहे हैं मैंने कहा कि चाचा चाचा ने गोश्त मंगाया है लेने जा रहा हूं। उसने मुझसे जबरदस्ती रुमाल और पैसे ले लिए और बोला कि तू मेरा गांव उतार दे मैं गोश्त लेकर आ रहा हूं। मैंने दुकान का रास्ता बता दिया था वजीर की आंखों के सामने अंधेरा छा गया और वापस घर आकर बैठ गया उसकी बेगम ने उसकी हालत देखी तो  ‘हाय अल्लाह’ क्या हो गया इन्हें।  वजीर बड़बड़ा रहा था जो कुआं खोदता है वही गिरता है मैंने दूसरे के लिए कुआं खुदा था और मैं खुद अपने होते हुए कुएं में गिर गया हूं।

Moral of this hindi stories for class 8

  • Never think anything bad about other people because it can be turned against you.
  • Also never think anything bad about good people.
  • Because God protects Good people.

स्वार्थी को सबक – Hindi stories for class 8 with moral

बिलाल स्वभाव का स्वार्थी था। वह दूसरों से सामान लेना जानता था , किंतु उसे लौटाना नहीं आता था। वह जिस व्यक्ति से पैसा लेता फिर उसे लौटाने की याद नहीं रहती। बिलाल धीरे – धीरे इतना ढीठ हो गया था कि लोग उसे लौटाने के लिए कहते , यहां तक कि अपशब्द भी कहते किंतु उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था।

जब भी उसे पैसे अथवा कोई सामान दूसरे व्यक्तियों से लेना होता तो वह मीठी – मीठी बातें करता चापलूसी करता। स्वार्थ के सिद्ध होने के बाद वह उस व्यक्ति को पहचानता तक नहीं था लौटाने की बात दूर रही।

बिलाल का एक पड़ोसी अहमद बड़ा ही सज्जन व्यक्ति था।

वह अल्लाह की रहमत मानता था , उसका मानना था जो भी अच्छा – बुरा होता है वह सब अल्लाह की मर्जी से होता है। वरना किसी के बस की बात नहीं कि अल्लाह के विरुद्ध कोई कार्यवाही कर सकें। बिलाल , अहमद जैसे सज्जन व्यक्ति को भी अपनी चाल में फंसाने से बाज नहीं आता था। बिलाल का शिकार अहमद भी बन चुका था।

बिलाल का लड़का काफी दिनों से बीमार था , उसे अस्पताल में इलाज करवाने के लिए पैसों की सख्त आवश्यकता थी। किंतु बिलाल के स्वभाव से सभी परिचित थे इसलिए उसे पैसे देने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ।

वह काफी परेशान हो गया था किंतु पैसों का इंतजाम होने का नाम नहीं ले रहा था।

रिश्तेदारों से भी उसने पैसे मांग कर देख लिया किंतु रिश्तेदार उसके स्वभाव से परिचित थे किसी ने पैसे नहीं दिए। अंत में उसे अहमद की याद आई , जानता था अहमद दिल का साफ है वह थोड़ी देर नाराज होगा किंतु पैसा तो जरूर दे देगा।

ऐसा विचार कर बिलाल अहमद के घर पहुंच गया।

आओ बिलाल कहो कैसे आए हो ?

बड़े दिनों बाद दिखाई पड़े  जैसे ईद का चांद हो गए तुम।

अहमद भाई दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है , बेटा अस्पताल में मेरा इंतजार कर रहा है।

क्यों क्या हुआ सब खैरियत तो है ?

नहीं अहमद भाई खैरियत होती तो , मैं यूं परेशान ना होता।

कहो मैं क्या खिदमत कर सकता हूं ?

अहमद भाई शर्मिंदा हूं किंतु इस समय पैसों की सख्त आवश्यकता है , अगर आप कुछ पैसों का प्रबंध कर देते तो रहमत होती।

या अल्लाह बच्चे पर रहमत कर ! कहते हुए अहमद भाई ने बिलाल को सामने रखें मटके की ओर इशारा करके कहा उस में से निकाल लो।

बिलाल खुश हो गया झटपट मटके के पास गया और हाथ डालकर खूब सारे पैसे निकालना चाहा किंतु यह क्या !  कुछ भी नहीं , मटका खाली है।

अहमद भाई यह मटका तो खाली है , क्या आप मेरे साथ मजाक कर रहे हैं ?

अरे वह मटका खाली है , लगता है तुमने जो पिछले पैसे लिए थे वह रखें नहीं होगे।

बिलाल शर्मसार हो गया उसका चेहरा कायरों की भांति लटक गया , इसका क्या जवाब दे सकता था।

अपनी  हरकतों पर वह केवल पछताने के अलावा कुछ नहीं कर सकता था।

आज उसे अपने सारे करामात याद आ रहे थे और आंखों से आंसू वह रहे थे।

अहमद नेक दिल इंसान था , वह केवल यह बिलाल को सबक सिखलाने के लिए कर रहा था। अहमद ने फौरन बिलाल को आवश्यकतानुसार पैसे देकर बच्चे के ठीक होने की रहमत मांग कर उसे अस्पताल के लिए रवाना किया। बिलाल ने अहमद भाई से कान पकड़ कर माफी मांगी और कहा अहमद भाई आपने मेरी आंखें खोल दी मुझे अल्लाह के दंड से बचा लिया वरना मैं अल्लाह को क्या जवाब देता।

Moral of the stories in English

  • Never be so much selfish that others get hurt by your actions.
  • Put yourself at the place of others before doing anything.
  • Try to be more social and understand other’s grief.

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