Love stories in hindi with moral – Prem kahani hindi mai

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Love stories in Hindi with moral – Prem kahani

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1. Old man with young girl – love stories in hindi

80 वर्ष के बुजुर्गों का दिल जब 25 साल की लड़की पर आया , फिर क्या होता है ? पूरी कहानी अंत तक पढ़िए –

कहते हैं प्यार की कोई उम्र नहीं होती जी। हां प्यार करने की कोई उम्र नहीं होती , प्यार प्रकृति से मिला एक उपहार है। प्यार बालक और माता के बीच भी होता है , वही पति – पत्नी के बीच भी प्यार का एक अटूट बंधन होता है। इसी प्रकार प्यार के अनेक – अनेक उदाहरण देखने को मिल जाएंगे। आज हम एक ऐसे प्यार पर नजर डालने जा रहे हैं जो वाकई में हैरान करने वाली सच्ची घटनाओं में से एक है।

राजीव लगभग 80 साल के बुजुर्ग है , किंतु इनका दिल आज भी जवान है।  घर में पत्नी , बेटी और यहां तक की अमेरिका में रह रहा एक बेटा भी है।  किंतु फिर भी वह अपने आप को अकेला महसूस करते हैं , क्योंकि उनका दिल जवान है। वह आज भी खूबसूरती के पीछे ऐसे भागते हैं जैसे कॉलेज के दिनों में , भागते थे।राजीव फेसबुक , व्हाट्सएप और अनेक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े रहते हैं।

दिन भर ऑनलाइन बनाए गए दोस्तों से बातें करते।

यह दोस्त कुछ स्त्री हैं , और कुछ पुरुष। यही इनके मनोरंजन का एकमात्र फिलहाल साधन है। राजीव जी की दोस्ती कुछ समय पूर्व स्पेन में रह रही एक 25 वर्षीय महिला मैरी से होती है। दोनों एक – दूसरे से अपने जीवन की अनेक घटनाओं को साझा करते और कुछ प्यार भरी बातें करते।

राजीव और मैरी दिन भर में न जाने कितनी ही देर बातें करते , दोनों को बातें किए बिना अब सुकून नहीं था। यहां तक कि शौच क्रिया के लिए भी बाथरूम में जाते , वहां भी अपना मोबाइल साथ ले जाते। इतनी नजदीकियां दोनों के बीच आ गई थी , बस उस घड़ी का इंतजार था जब दोनों आमने-सामने हो सकते। और जो कसक दोनों के दरमियां थी उसको मिटाना चाहते थे। मैरी कभी भी तनाव में अथवा संकट में रहती , तो राजीव झटपट उस तनाव अथवा संकट को दूर करने का प्रयत्न करते।

कभी पैसे भेज कर तो कभी उपहार भेज कर।

राजीव को अब मैरी के अलावा कुछ और नहीं दिखाई देता था। वह मैरी के लिए अब तक लगभग दो करोड रुपए खर्च कर चुका थे।  यहां तक कि अपनी पत्नी के गहने तक चोरी करके , मैरी के शौक पूरे करता थे।  किंतु मैरी के शौक कहां पूरे होने वाले थे। कहते हैं स्त्रियों के लिए जितने भी धन खर्च करो उतने ही कम है , यही कहावत मैरी पर ठीक साबित हो रही थी।

राजीव ने अपना सारा धन मैरी के शौक के लिए लुटा दिया था। पत्नी के गहने जो धरोहर रूप में थी , उसे भी चोरी करके बेच चुके थे।  अब केवल घर और अचल संपत्ति ही बाकी थी , जिसका सौदा वह करना चाह रहे थे। किंतु अमेरिका में रह रहे बेटे को इसकी खबर लग गई , और उसने अपने पिता को ऐसा करने से रोक दिया। पिता अपने बेटे के दबाव में कहां आने वाले थे , उन्होंने एड़ी – चोटी का दम लगा लिया और वह संपत्ति का सौदा करने के लिए सेठ के पास पहुंचे।

तभी उन्हें फोन आता है –

यह फोन एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का होता है , उन्होंने राजीव को अपने ऑफिस मिलने के लिए तुरंत बुलाया। राजीव झट-पट अधिकारी से मिलने पहुंचे। वह एक महिला गिरफ्त में बैठी हुई थी , अधिकारी ने राजीव का परिचय कराया। क्या आप इस महिला को जानते हैं ? राजीव पहले इस महिला से नहीं मिले थे , इसलिए पहचानने से इंकार कर दिया। अधिकारी ने बताया यह महिला लोगों को खूबसूरती और प्रेम में लोगों को फंसा कर पैसे लुटती है और इसके शिकार आप भी हुए हैं। आपने जिस मैरी नाम की महिला को पैसे दिए हैं यह वही मैरी है !

अब राजीव को कुछ समझ नहीं आ रहा था , खड़े-खड़े वह गिर पड़े।

पूरा शरीर पसीने से तरबतर था , लोगों ने सहारा देकर उन्हें एक किनारे लिटाया।  जब होश आया तो उन्हें समझाया गया और उन्हें विश्वास में लेकर घर भेज दिया गया। राजीव अब समझ चुके थे कि उन्होंने जीवन की कितनी बड़ी भूल की। पत्नी के रहते हुए वह किसी और महिला के पीछे अपने जीवन की संचित संपत्ति को लुटा चुके थे ।

समय रहते घर बच गया अन्यथा वह सड़कों पर रहने के लिए मजबूर हो जाते।

संदेश –

  • आजकल सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों के साथ धोखाधड़ी का मामला देखने को मिल रहा है।
  • इसके शिकार  युवा और बुजुर्ग व्यक्ति हैं।
  • खासकर के वह जो किसी कारण से अपने आप को अकेला महसूस करते हैं।
  • ऐसे व्यक्ति इन धोखेबाजी के जाल में आसानी से फंस जाते हैं , इसलिए व्यक्ति को सतर्क और जागरूक रहना चाहिए।
  • खास करके पैसे के लेनदेन में सावधानी अवश्य बरतनी चाहिए।

Moral of this love stories in Hindi

Beware of the girls and women online these days.

You cannot find true love on the Internet without meeting anyone actually. If we find a reaction of the audience good then we will write more this type of love story in Hindi with moral value.

 

2. दोस्त की बहन से करता था प्यार , हत्या के केस में फंसा दिया – Love stories in hindi with moral value

कहते हैं दोस्ती यारी में सब कुछ जायज है , दोस्ती की मिसाल ऐसी – ऐसी हैं जैसे ‘ दो जिस्म एक जान ‘ की कहावत। जहां एक दोस्त , दूसरे दोस्त के दुख को अपना दुख मानकर जीता है।

ऐसे ही अनेक उदाहरण देखने को मिल जाएंगे।

आज हम ऐसी कहानी लिख रहे हैं जो सत्य पर आधारित है –

बृजेश और रमन दोनों सच्चे मित्र हैं , दोनों एक- दूसरे के प्रति सहनशील और सम्मान की भावना रखते हैं। दोनों दिल्ली के एक नामी कॉलेज में पढ़ते हैं। बृजेश की एक छोटी बहन अनन्या भी है जो कॉलेज में पड़ती है। बृजेश और रमन की दोस्ती आज की नहीं बल्कि यह बचपन से ही मित्र हैं , इसलिए दोनों एक – दूसरे के घर आते – जाते और घर के बेटे की तरह रहते।

रमन , अनन्या से धीरे – धीरे प्रेम करने लगा।

अनन्या भी रमन से प्रेम करने की इच्छा जता चुकी थी , किंतु रमन काफी समय तक अनन्या से दूर रहता था।  बृजेश का जन्मदिन था , रमन दो दिन पहले से जन्मदिन को धूमधाम से मनाने के लिए तैयारी कर रहा था। अनन्या को मौका मिला था , वह रमन के और नजदीक आती रही।

रमन भी अनन्या से कितने दिन दूर रहता ? और कब तक अपने आप को बचाता ?

संयोग से दोनों मैं करार हुआ और प्रेम के अनंत सागर में दोनों गोते खाने लगे।

धीरे-धीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा। पहले बृजेश को लगता था दोनों में भाई – बहन का प्यार होगा। किंतु जब अफवाहें गर्म होती गई तो बृजेश , रमन से ईर्ष्या करने लगा।

अब दोनों के बीच वह तालमेल नहीं था जो पिछले कुछ महीनों तक रहा था।

बृजेश अब रमन से दूरी बनाने लगा और बदला लेने की भावना से जीने लगा। इसके लिए वह अपने अन्य दोस्तों से संपर्क करता और बदला लेने का मार्ग खोजता। कहते हैं बुराइयों के लिए अनेकों मार्ग होती है , किसी दोस्त ने मुसलमान कॉलोनी में कादरी भाई से मिलने की सलाह दी। बदला लेने की भावना में बृजेश जल रहा था , इसलिए कादरी भाई से मिलने मे देरी नहीं की।  तुरंत जाकर मिला 50,000 में बृजेश को सबक सिखाने के लिए तय हुआ और यह सबक , कुछ और नहीं एक हत्या में बृजेश को फसाने की साजिश थी।

ऐसा ही हुआ , रेलवे फाटक पर एक प्राइवेट कंपनी के मैनेजर की हत्या हुई , पुलिस की तफ्तीश शुरू हुई। जिसमें शुरुआती तफ्तीश में रमन का परिचय पत्र कुछ दूर गिरा हुआ मिला , पुलिस को संदेह हुआ कि भागते समय यह कार्ड वहां गिर गया होगा। पुलिस ने तुरंत रमन को पूछताछ के लिए बुलाया , साथ ही एक व्यक्ति मुस्तकीन और पकड़ा गया , जो इस अपराध में शामिल था। मुस्तकीन , रमन को हत्या में शामिल होने की बात पुलिस को बताई।

पुलिस अब और पुख्ता सबूत के तौर पर रमन को अपराधी मानने लगी।

रमन और पकड़े गए दूसरे अपराधी मुस्तकीन से जब कड़ी पूछताछ हुई। रमन ने अपने आप को बेगुनाह बताया , जबकि मुस्तकीन ने रमन को अपराध में शामिल होने की बात स्वीकार की ।

मुस्तकीन ने रमन के हत्या में शामिल होने पर पुलिस को अलग-अलग समय बताया , जिस पर पुलिस को संदेह हुआ और छानबीन शुरू हुई। रमन ने हत्या के समय खुद को एक होटल में होने का प्रमाण दिखाया , जहां पुलिस ने छानबीन की और वहां लगे सीसीटीवी कैमरे को खंगाला।

जिसमें रमन स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

पुलिस ने जब कड़ाई से पूछताछ की तो रमन के लिए बृजेश ने 50000 में साजिश की यह बात निकल कर सामने आया। बृजेश , कादरी भाई और एक हत्या करने वाला अपराधी मुस्तकीन तीनों को पुलिस ने गिरफ्तार किया और रमन को बाइज्जत बरी किया। रमन को तनिक भी अच्छा नहीं लग रहा था , उसके आंखों में आंसू थे। जो उसका बचपन का दोस्त था , उसी ने हत्या की साजिश रची।

बृजेश के पास क्षमा मांगने के लिए भी शब्द नहीं थे.

वह अब गिलानी के भाव से डूबा हुआ था।

बृजेश ने अपने गुनाहों को पुलिस के सामने कबूल कर लिया.

जिसमें बृजेश , कादरी और मुस्तकीन को हत्या करने के आरोप में जीवन भर का कारावास मिला।

संदेश –

‘ बुरे काम क सदैव बुरा ही नतीजा होता है ‘

बृजेश ने रमन के साथ जो बदला लेने की भावना अपने मन में पाली यह बुरे कर्मों में तब्दील हो गई , और इसका नतीजा भी बुरा ही सामने देखने को मिला। बृजेश चाहता तो अपनी बहन और रमन को समझाता और ना समझने पर कड़ाई से विरोध करता।

किसी व्यक्ति की हत्या करना और उसके जुर्म अपने माथे लेना यह किसी भी समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हो सकता है। इसलिए व्यक्ति को सदैव बुरे कर्मों से दूर रहना चाहिए और किसी के प्रति ईर्ष्या – द्वेष से कोई साजिश नहीं रचनी चाहिए। यह साजिश के जाल में वह स्वयं अपने आप को फंसा लेता है , ऐसा आभास अंतिम क्षणों में होता है जब उसके पास कोई और मार्ग नहीं रह जाता।

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3. Bewafa girlfriend ki kahani – Emotional love stories in hindi

‘ मदुरई ‘ दक्षिण भारत का एक प्रमुख शहर है , यह शहर धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां एक प्राचीन मंदिर है जो मीनाक्षी देवी के नाम से जाना जाता है।

इस मंदिर के प्राचीनतम साक्ष्य शहर की गरिमा को और बढ़ाते हैं।

धीरे – धीरे शहर का विस्तार होता गया और अप्रवासी लोग यहां आकर बस गए।

इन्हीं अप्रवासी लोगों में दादा मूलचंद और धनंजय का परिवार भी है , दोनों पड़ोसी हैं।

दादा मूलचंद का पोता सुशांत और धनंजय की बेटी अवनी एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं। दोनों बचपन से साथ – साथ , खेलते – कूदते और पढ़ते बड़े हुए। समय बड़ा तेजी से बदलता है , देखते ही देखते दोनों बड़े हो गए और अब कॉलेज की पढ़ाई भी लगभग समाप्त होने वाली थी। सुशांत नाम के अनुसार बेहद ही शांत और हंसमुख प्रवृत्ति का लड़का है , वही अवनी खुले विचारों वाली और चंचल लड़की है। वह दुनिया की  चकाचौंध भरी जिंदगी को जीना चाहती है , और अपने सहेलियों से किसी भी बात में कम दिखना नहीं चाहती है।

कुछ समय बाद

दादा मूलचंद और धनंजय ने आपस में दोनों ( सुशांत – अवनी ) की शादी का मन बना लिया था।

दोनों एक दूसरे को जानते थे और बचपन से एक दूसरे को समझ रहे थे।

जब शादी की बात सुशांत और अवनी को बताया गया तो , अवनी ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि – ‘ वह बड़े पैसे वाले से शादी करेगी , जिससे उसकी जिंदगी एस मौज में गुजरेगी , किसी भी चीज की कोई कमी नहीं रहेगी।’ अवनी का परिवार बेहद ही साधारण और मध्यमवर्गीय था , परिवार की इतनी हैसियत नहीं थी कि वह किसी अमीर घर में रिश्ते की बात कर सके।

किंतु अवनी की जिद के आगे किसी घरवाले ने जोर – जबरदस्ती नहीं की।

समय दर समय वितता गया , लगभग पांच साल बीत गए  होंगे।

अवनी का परिचय सोशल मीडिया के माध्यम से मदन से हुई।

मदन काफी अमीर लड़का था , जिसके पास पैसे की कोई कमी नहीं थी।

रोज वह महंगी घड़ी , गाड़ी वह कपड़ों के साथ फोटो खींचता और बड़े-बड़े रेस्टोरा में खाना खाने जाता। अवनी को ऐसी ही जिंदगी पसंद थी , इसलिए अवनी – मदन से करीबियां बनाती रही।

मदन भी अवनि से प्रेम करने लगा था।

दोनों परिवार ने समय देखकर मदन और अवनी की शादी करा दी , अवनी को अब अपने सपनों की दुनिया में जीना था।

उसने जितने ख्वाब देखे थे वह अब आंखों के सामने था।

अवनी अब एस – मौज की जिंदगी को भरपूर आनंद के साथ जीना चाहती थी और जीने लगी।

दीपावली का समय था घर , बाजार , दुकान , मॉल सभी सजे हुए थे।

जगह-जगह , रंग – बिरंगी छटाएं बिखरी हुई थी।

अवनी – मदन के साथ मॉल में दीपावली के शॉपिंग करने पहुंची।

मदन को कुछ काम था इसलिए अवनी को अकेला छोड़ कर वह अपने काम को निपटाने के लिए चला गया।

अवनी कुछ कदम आगे बढ़ी होगी कि सामने सुशांत नजर आया।

दोनों एक – दूसरे को पहचान गए और मिलने के लिए करीब पहुंचे , सुशांत ने हालचाल पूछा तो अवनी के तेवर बदले हुए थे। उसके हाव – भाव में एक अलग प्रकार का टोन था , क्योंकि अब वह अमीर थी कहां उसके परिवार वाले मध्यम वर्गीय परिवार में शादी करवा रहे थे।

उस जिंदगी से बेहतर जिंदगी आज अवनी जी रही थी इसलिए स्वभाव में दिखावा और बातों में रोब था।

अवनी ने बताया कि आज उसके पास खुद का बड़ा घर है , गाड़ी है और उसके पति डेढ़ लाख रुपए महीने का कमाते हैं। सुशांत , अवनी की बातें सुनता रहा किंतु एक शब्द भी नहीं कहा और शायद अवनी लगातार बोल रही थी वह सुशांत को यकीन दिलाना चाह रही थी कि उससे शादी ना करके अवनी ने ठीक किया।

एक-एक करके अपनी सारी अमीरी सुशांत को कह सुनाई।

लगभग बीस मिनट बीत गए किंतु अवनी की बातें खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी।

तभी मदन अपना काम निपटाकर वापस आता है और अवनी , सुशांत को बात करता देख आश्चर्यचकित रह जाता है।

Conversation between Madan and Avani

मदन     –  अवनी क्या तुम सुशांत जी को पहले से जानती हो ?

अवनी   – जी  हां !

मदन     –  तुम सुशांत को कैसे जानती हो ?

अवनी    – मैं सुशांत को बचपन से जानती हूं , यह मेरे पड़ोसी थे और मेरी शादी घरवाले इनसे ही करवाना चाहते थे।

मदन     – यह तो मेरे बॉस है , मैं इनकी कंपनी में काम करता हूं।

अवनी कुछ देर चुप रही उसको समझ नहीं आ रहा था कि वह किस प्रकार की प्रतिक्रिया दें। क्योंकि जिसे वह गरीब और न जाने क्या क्या समझ कर इतनी सारी बातें सुना दी और जीवन के सुनहरे अवसर को खुद अपने हाथों से दूर कर दिया।

आज उसके लिए हंसे , रोए क्या करें ?

यह अवनी की समझ से बाहर था।

आज पहली बार ऐसा महसूस हो रहा था कि उसके पैरों के नीचे जमीन नहीं है , वह हवा में उड़ती जा रही है। पैसा समय का फेर है , मेहनत करके सुशांत ने यह साबित कर दिया किंतु जिस प्रेम ने उसको ठुकराया वह स्वयं पश्चाताप की अग्नि में जलने लगी।

इसलिए व्यक्ति को चाहिए प्रेम जहां भी मिले उसका सम्मान करना चाहिए।

पैसा वह प्रेम और सम्मान नहीं दे सकता जो आपको प्रेम के द्वारा प्राप्त हो सकता है।

अवनी की छोटी सी भूल उसके जीवन भर का पश्चाताप बन गया।

This is the end of this emotional love stories in Hindi.

We hope that you must have loved this story.

Final words

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