3 Moral stories in hindi motivational हिंदी मोरल कहानिया

आज हम पढ़ेंगे कहानियां जो मजेदार भी हैं और शिक्षाप्रद भी। We aim to write best motivational and moral stories in hindi for children. Today we again came with powerful moral stories in hindi for you story lovers. Hope you will love these stories. Tell us in comment box how much do you love it, after reading.

3 Simple Powerful moral stories in hindi with values

Read these stories carefully and try to grasp the essence.

1.असफलता का भय ( Moral stories in hindi to overcome fear )

मैं आपके समक्ष एक कहानी प्रस्तुत करता हूँ जिससे आप अपने भय से अवगत हो सकेंगे तथा अपने भय को दूर करने का मार्ग ढूंढ पाएंगे |

Many people has fear of failure. This moral story written in hindi will help to overcome fear.

कहानी दो दोस्तों की

दो दोस्त रवि और शंकर एक गावं में रहते थे। उन दोनों में बहुत घनिष्ट मित्रता थी। दोनों जो काम करते साथ ही करते थे। रवि किसी भी काम को करने में डरता था। उसे यह भय सताता की फेल हो जाऊंगा तो लोग मेरा मजाक उड़ायेंगे उसका उपहास करेंगे। वह अपने काम के सिवा और कुछ नहीं करता था। जबकि शंकर की सोच उससे नहीं मिलती थी उसे जो काम मिलता वह उस कार्य को करके ही छोड़ता था।

एक बार उनको एक काम मिला , उस काम को करने दुसरे गावं में जाना था। उस काम को करने में एक शर्त थी। किन्तु काम को करने का कोई पैसा नहीं मिलेगा और काम करने से पहले उसका टेस्ट भी लिया जाएगा। जो उस टेस्ट में पास होगा उसे ही काम मिलेगा।

काम कुछ इस तरह था की पहले काम को कुछ दिन ऐसे ही करते रहना है जैसे-जैसे उस काम को करते जायेंगे। जितना उस काम में अनुभवी बनोगे उतना ही आगे जाओगे। बहुत से लोग इसलिए नहीं गए की उसमे टेस्ट है और बहुत से इसलिए नहीं गये की पैसा नहीं है।

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कभी भी हार मत मानो

रवि पहले ही उस काम को छोड़ दिया। उसका कहना था “टेस्ट में ही फेल हो गया तो , छोडो यार क्यों बिना मतलब के इन सब चक्करों में पड़ना , जो कर रहे है वही अच्छा है।

क्यों रिस्क लेना ? ऐसा न हो की इधर से भी जाये और उधर से भी।

रवि असफलता के भय से पहले ही हार गया। शंकर उसे चुनौतियों का सामना करना अच्छा लगता था।

उसको भी सभी ने मना किया , सभी ने सलाह दिया की उसे अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। मगर शंकर को अपने आप पर विश्वास था उसे पता था की कर जायेंगे और वह कर भी गया | शंकर उस काम में लगा रहा। पहले तो वह बिन पैसो के काम करता रहा। लोग उसे ताने मारते और अलग-अलग सलाह देते मगर वह अपना काम करता गया। और वह अंत में successful भी हुआ।

अब रवि में और शंकर में जमीन आसमान का फर्क आ चूका था। रवि वही-का-वही था जबकि शंकर बहुत ही आगे निकल गया।

कहानी से सीख क्या मिलती है

मनुष्य का जीवन बहुमूल्य है। मनुष्य ही एक मात्र बुद्धिजीवी प्राणी है जो अपना भूत – भविष्य – वर्तमान पर विचार कर सकता है। इस जीवन के कितने ही महत्वपूर्ण क्षण इन्सान भय के कारण खो देता है। यह भय और कुछ नहीं बल्कि स्वयं की कल्पना होती है यह भय है – अपनी गरीबी का, वर्तमान स्थिति से बदतर होने का , संचित धन के खोने का , जो प्यार है उसे खोने का।

इस भय के कारण इन्सान अपने उन सभी रास्तो को स्वयं बंद कर लेता है जो उसको एक नया मुकाम दे सकते है। वह इंसान आगे बढने वाला काम नही कर पाता है। उसे हमेशा ही यह डर सताता है कि असफल हो गया तो क्या होगा ? क्या सोचेंगे लोग ?

बस! इसी आलोचना और असफल होने के भय से वह कदम आगे नहीं बढ़ा पाता है। सफलता किसी की मौहताज नहीं होती जो व्यक्ति निष्ठां से कार्य करता है उसे सफलता अवश्य मिलती है। इस भय पर जिसने भी पार पाया है , वह जीवन में सफल हुआ है। गाँधी जी अंग्रेजो के द्वारा प्रताड़ित और अभद्र टिप्पणी सुनकर बैठ जाते तो आज हमे उस जैसे महात्मा से प्रेरणा नहीं मिलती।

इस प्रकार सभी व्यक्तियों ने सफल होने के लिए समय से संघर्ष किया है।

जीवन में संघर्ष आवश्यक है

उस व्यक्ति को वह हर चीज मिला है जो उसे चाहिए किन्तु संघर्ष के रूप में । वह उनको इसलिए मिला की उन्होंने अपने भय को हराया है अपने हालत से पर्तिस्पर्धा किया है , अपने भय से भयभीत होकर पीछे नहीं हटे बल्कि उनका मुकाबला किया और दुनियाँ के सामने उदाहरण पेश किया।

अवसर समान रूप से सभी को मिलता है , ऐसा कभी नहीं होता कि किसी को अवसर न मिला हो। इस अवसर को कोई भय से गवां देता है तो कोई सोचने में समय निकाल देता है और बाद में पछताता है।

वह व्यक्ति स्वयं कोई जिम्मेदारी नहीं लेता बल्कि सारी जिम्मेदारी हालत पर डाल कर कोसता रहता है।

जबकि कुछ लोग उस अवसर को चुनौती के रूप में लेते है और अपने भय को दबाकर उस काम/लक्ष्य पर विजय पाते है जो उसने निश्चित किया हो।

Moral of this hindi story

अवसर सभी को समान रूप से मिलता है | भले ही तुम्हे असफलता मिले लेकिन अगर काम करने में मजा आ रहा है तो उसे कभी मत छोडो | आस पास के लोग लाखों की तरह की बातें बनाएँगे |

परन्तु तुम्हे उन पर ध्यान नहीं देना | तुम जरूर सफल होंगे |

This was the first of the two moral stories in hindi. Read more below

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2.लालची सब्जी वाला Moral stories in hindi for success

This is another moral stories in hindi with beautiful and interesting set up. Must read till end.

मदनपुर गांव में अब्दुल नामक एक सब्जी वाला था। वह लोगों को महंगी सब्जियां बेचा करता था और यह विश्वास दिलाया करता था कि यह ताजी सब्जियां है। किंतु अब्दुल इतने में भी संतुष्ट नहीं था , वह चाहता था कि जल्दी से जल्दी पैसा कमाया जाए और बड़ा व्यापार शुरू किया जाए। वह इस उधेड़बुन में काफी दिनों से लगा हुआ था। उसकी यह उधेड़बुन उसकी पत्नी ने देखा और पूछना चाहा तो अब्दुल कुछ नहीं बोला।

एक दिन वह बाजार गया और 200 ग्राम का एक चुंबक ले आया , और अपने तराजू में उसको चिपका लिया।

इससे वह जो भी सामान तोलता उसमें 200 ग्राम वजन कम हो जाता।

1 किलो आलू के पैसे में अब वह 800 ग्राम ही बेचा करता था।

इससे उसे सीधे – सीधे 200 ग्राम का मुनाफा प्रत्येक ग्राहक से होने लगा।

ऐसा करता देख बिबी ने अब्दुल को खूब समझाया।

यह धोखाधड़ी है !

ऐसा करना पाप है। ग्राहक अल्लाह के समान है , अल्लाह की मेहरबानी होगी तो हम जल्द अमीर बनेंगे ,

किंतु इस बेइमानी से अल्लाह भी नाराज होगें।

किंतु अब्दुल नहीं माना और यह कार्य करना उसने नहीं छोड़ा।

1 दिन की बात है हामिद ,  अब्दुल मियां के यहां सब्जी खरीदने गया ।

हामिद ने 2 किलो आलू माँगा , अब्दुल मियां ने झटपट आलू तोलकर हामिद को थमा दिया।

हामिद को कुछ खटका हुआ उसने पूछा –

मियां इसमें वजन कुछ कम लगता है !
अब्दुल नहीं – नहीं ये ठीक वजन है , तुम्हें वहम हो रहा है।

बेईमानी का फल बुरा ही होता है

हामिद कुछ कर नहीं सकता था। वह सब्जी लेकर दूसरी दुकान पर गया । और उसने वहां सब्जी का वजन करवाया तो उसमें से 200 ग्राम कम निकला। हामिद समझ गया था कि अब्दुल मियां ठगी का कार्य कर रहे हैं। बस क्या था हामिद एक तराजू लेकर अब्दुल मियां के दुकान के सामने पहुंचे और जोर – जोर से बोलने लगे , आओ आज मैं जादू दिखाता हूं – मेरे पास एक तराजू है इसमें कितना भी सामान तोलोगे 200 ग्राम कम ही तोलेगा। लोगों को आश्चर्य हुआ कि यह क्या कह रहा है देखते ही देखते लोगों की भीड़ जमा हो गई। हामिद ने बताया किस प्रकार अब्दुल मियां से उसने 2 किलो आलू तो लगाए किंतु वह 1 किलो 800 ग्राम ही तौल कर दिया।

बात बढ़ती गई अंत में लोगों को समझ आ गया कि अब्दुल मियां काफी दिनों से हम लोगों को बेवकूफ बना रहे थे ।

और कम सब्जी तौल कर हम लोगों से पैसा हड़प रहे थे।

अब्दुल मियां अपनी गलती नहीं मान रहे थे और लोगों से झगड़ा करने लगे।

बस क्या था लोगों की भीड़ ने अब अब्दुल मियां की खूब पिटाई करी।

अब उसे समझ आ गया था कि गलत काम का गलत नतीजा होता है।

Moral of this story –

लालच बुरी बला है |

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In our point of view this is the best motivational moral stories in hindi For students or children.

इस कहानी का moral

MORAL

जो हम करना चाहते है वही करे ,जिसे करने को दिल कहे वही करे.

उसे ही छोटे-से-छोटे LEVEL पर शुरू करे. कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता.

जो करना चाहते है उसे अभी तुरंत कोजिए. बाद पर कभी मत टालें।

इस बारे मत सोचिये की सफल होंगे या असफल।

आप तो सफल है क्यों की आप वही कर रहे है जिसे करने से आपको ख़ुशी मिल रही और ख़ुशी ही सफलता है।

दुसरे क्या कहेंगे इस बात पर बिलकुल धयान न दे.

दुनियाँ का काम है कहना आप अपना काम करे।

जो भी करे उसमे अपना 100% दें.

आधा-अधुरा मन से काम कभी नहीं करे।

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